रांची में सीवरेज पाइपलाइन बिछाने वाली कंपनी की कार्यप्रणाली ठीक नहीं : महेश पोद्दार

महेश पोद्दार ने मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी को पत्र लिखा - Panchayat Times

रांची. राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी को पत्र लिखा है. उन्होंने रांची नगर निगम की तरफ से क्षेत्र में सीवरेज पाइपलाइन बिछाने के तरीके पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने पाइपलाइन बिछाने के लिए अपनायी जा रही तकनीक पर भी सवाल खड़ा किया है. पत्र में उन्होंने इस कार्य से जुड़ी कंपनी की कार्यप्रणाली की जांच कर उस पर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है.

सांसद ने कहा कि कंपनी को परियोजना की एक तिहाई राशि लगभग 74 करोड़ रुपए भुगतान किए गए हैं. लेकिन अभी तक कंपनी अपना काम पूरा नहीं कर पाई है. सांसद ने 21 जुलाई को कंपनी के अधिकारियों के साथ बैठक का हवाला भी दिया.

डिजाइन और डीपीआर 12 साल पुराने 

महेश पोद्दार ने पत्र में लिखा है कि रांची में सीवरेज-ड्रेनेज परियोजना का कार्य वर्ष 2006 में शुरू किया गया था. इसका डिजाइन और डीपीआर सिंगापुर की मैनहर्ट कंपनी ने तैयार किया था. बारह साल बीतने के बाद आज भी इसी पुराने डिजाइन और डीपीआर के आधार पर ही टेंडर जारी कर परियोजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है. परियोजना की प्राक्कलित राशि तब 359 करोड़ रुपए थी, लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि परियोजना के क्रियान्वयन में लगी पूरी टीम में से संभवतः किसी को भी नहीं पता कि परियोजना के क्रियान्वयन में कुल कितनी राशि का व्यय किया जायेगा. वहीं, जब टेंडर जारी किया गया था, तब प्रस्तावित सीवरेज लाइन की कुल लंबाई 192 किलोमीटर थी, जो अब तक बढ़कर 280 किलोमीटर हो चुकी है.

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उन्होंने कहा कि परियोजना कहने को तो सीवरेज–ड्रेनेज से संबंधित है, लेकिन वस्तुस्थिति यह है कि काम केवल सीवरेज का ही हो रहा है. नगर निगम के मुताबिक, मात्र 3.5 किलोमीटर लंबे ड्रेनेज का ही निर्माण हो रहा है. उन्होंने कहा कि परियोजना के क्रियान्वयन में करीब आधा दर्जन एजेंसियां जुड़ी हैं, लेकिन हस्यास्पद है कि कोई भी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं. परियोजना के बेसिक काम अर्थात सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण अब तक हुआ ही नहीं है. इसके उलट बरसात के मौसम में सड़कें खोदकर छोड़ दी गयी हैं. वहीं, कई जगह सीवर के पाइप डालकर उन्हें केवल मिट्टी से ढंककर छोड़ दिया गया है. इस वजह से सड़कें और गलियां कीचड़मय हो गयी हैं और लोगों का चलना–फिरना दुश्वार हो गया है. निगम ने भी स्वीकार किया है कि कंक्रीट के जरिये सड़क को पूर्ववत समतल बनाने के बाद सही तरीके से क्युरिन भी नहीं किया गया अर्थात सड़क का भविष्य वैसे भी संदिग्ध ही है.

अमृतसर में ब्लैकलिस्टेड

उन्होंने कहा कि जिस एजेंसी को यह कार्य आवंटित हुआ है, वह अमृतसर में ब्लैकलिस्टेड हो चुकी है. संभवतः यहां भी एजेंसी की सारी दिलचस्पी सड़कें खोदने और पाइप डालने में ही है. सड़कें खोदकर और उसमें पाइप डालकर वह उसमें मिट्टी, गिट्टी और सीमेंट से उसे ढंककर उसकी मापी के हिसाब से भुगतान पा रही है. सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण में अपेक्षाकृत कम दिलचस्पी ली जा रही है. एजेंसी को अब तक 74 करोड़ रुपए यानि करीब एक तिहाई परियोजना राशि का भुगतान किया गया है. ऐसे में अगर एजेंसी काम बंद कर देती है, तो सरकार की यह परियोजना अधर में लटक सकती है. इसमें जनता की एक बड़े राशि की बर्बादी हो सकती है.