रक्षा बंधन मनाएं, बस इस छोटी सी बात का ध्यान रखें

अधिकतर लोग सुबह के समय ही रक्षा बंधन पर्व मनाते हैं - Panchayat Times

जोगिंद्रनगर (मंडी). लोक परंपरा तथा आज-कल की व्यवस्तताओं के कारण अधिकतर लोग सुबह के समय ही रक्षा बंधन पर्व मनाते हैं. इस पर्व में दूसरों की रक्षा के धर्म भाव को विशेष महत्व दिया गया है. रक्षा बंधंन का वैदिक स्वरूप यही है. इस दिन बहनें भाइयों को राखी बांध कर अपनी जीवन रक्षा का दायित्व उन पर सौंपती हैं, साथ ही भाई की सलामती की दुआ भी मांगती हैं. 26 अगस्त के दिन शाम साढ़े चार बजे से छह बजे तक राहुकाल रहेगा. इस समय राखी बांधी नहीं जा सकेगी.

रक्षा बंधंन का त्यौहार हर साल श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है. इस वर्ष 26 अगस्त रविवार को रक्षा बंधंन का पवित्र त्यौहार मनाया जाएगा. रक्षाबंधन के दिन एक शुभ संयोग बनने जा रहा है. दर असल चार वर्ष में पहली बार राखी के दिन भद्रा का साया नहीं रहेगा. ज्योतिष के पंचाग में भद्राकाल को अशुभ माना जाता है. जोगिंद्रनगर में शारदा ज्योतिष निकेतन के संस्थापक कैप्टन डॉ. लेखराज शर्मा ने इसकी जानकारी दी है.

अधिकतर लोग सुबह के समय ही रक्षा बंधन पर्व मनाते हैं - Panchayat Times

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डॉ. लेखराज शर्मा ने कहा कि इस बार रक्षाबंधन ग्रहण के योग से भी मुक्त रहेगा. भद्रा दिन की शुरुआत में ही समाप्त होने से राजयोग बना रहेगा. रक्षाबंधन पर भद्राकाल नहीं होने से दिनभर राखी बांधना शुभ है. हालांकि, बहने राहुकाल में अपने भाइयों को राखी बांधने से बचें. 26 अगस्त के दिन शाम 16:30 से 06:00 बजे तक राहुकाल रहेगा. इस समय राखी बांधी नहीं जा सकेगी. पूर्णिमा तिथि शाम पांच बजकर 26 मिनट तक रहगी. रक्षा सूत्र हाथ में जन्माष्टमी तक रहना चाहिए. रक्षा सूत्र सूती धागे का होना बेहतर होता है.

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