बहुत जल्द लोगों को मिलने वाला है ‘राइट टू वाटर’ एक्ट

क्या प्यासे को पानी पिलाएगा राइट टू वाटर एक्ट ? - Panchayat Times
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नई दिल्ली. क्या प्यासे को पानी पिलाएगा राइट टू वाटर एक्ट ? पानी हर इंसान के लिए जरूरी है. पीने के पानी के बिना हमारा बच पाना असंभव है. पूरी दुनिया में पानी को लेकर चिंतन-मनन जारी है. पानी नहीं होने के कारण दुनिया में कितने गांव, कितने शहर बर्बाद हो गए. भारत में भी पानी की समस्या गंभीर हो चली है. यहां गाहे-बगाहे पानी को बचाने की बात की जाती है, लेकिन अभी बहुत कुछ करना बांकी है. कई राज्यों की तरह मध्यप्रदेश भी पानी की कमी से जूझ रहा है. यहां की ग्रामीण जनता पानी के लिए बहुत हदतक कूंए और तालाब पर निर्भर हैं. सूखे की मार झेल रहे एमपी में राज्य सरकार बहुत जल्द ‘राइट टू वॉटर’ ला सकती है. यानि कि सभी को पानी का अधिकार. ठीक वैसे ही जैसे मनरेगा के तहत मजदूरी का अधिकार और शिक्षा का अधिकार.

पूरी दुनिया में जलसंकट एक बड़ी समस्या बन रही है - Panchayat Times
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कयास लगाए जा रहे हैं कि कमलनाथ सरकार बहुत जल्द पानी का कानून पास करेगी. इसके साथ ही स्कूलों में भी पानी को बचाने के बारे में पढ़ाया जाएगा. तालाब-कूएं का निर्माण और मरम्मत कर लोगों तक पानी पहुंचाने की कोशिश की जाएगी. सबको 55 लीटर पानी के अधिकार की बात सामने आ रही है. पानी पहुंचाने के लिए गांव और ग्रामीणों की मदद ली जाएगी. वाटर हारवेस्टिंग यानि पानी को बचाने पर भी पूरा जोर होगा. राज्य के पीएचई मंत्री सुखदेव पांसे ने कहा कि पानी बचाना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है. दरअसल इसी एक्ट को लेकर भोपाल में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया था. जिसमें तमाम संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया.

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इस तरह के एक्ट और मुहिम को जल्दी ही शुरू कर देना चाहिए न सिर्फ मध्य प्रदेश में बल्कि शिमला-सोलन जैसे पहाड़ी क्षेत्रो में भी पानी को लेकर काफी काम करने की जरूरत है. पूरे देश में अगर राइट टू वाटर जैसे एक्ट पास हो जाए तो टैंकर माफिया से भी दिल्ली जैसे शहरों को राहत मिल सकती है. क्योंकि स्थिति ये है कि लाखों घरों में पानी पहुंचता तो है लेकिन प्राइवेट टैंकर्स को मोटा पैसा देने के बाद.

 क्या प्यासे को पानी पिलाएगा राइट टू वाटर एक्ट ? - Panchayat Times

इसी तरह से प्राइवेट पार्टी पानी को लूटते रहेंगे तो आगे ऐसा न हो जाए कि पानी पैसा देकर भी न मिले. सरकारों को इस ओर ध्यान देना चाहिए कि पानी की कमी है और उपलब्धता हर जगह चाहिए. इस तरफ ध्यान देते हुए राइट टू वाटर के साथ-साथ लोगों की सामूहिक जिम्मेदारी भी तय किये जाए. पानी बर्बाद करने पर सजा का प्रावधान भी किया जाना चाहिए. अगर हम संभाल कर पानी का इस्तेमाल नहीं करेंगे तो बहुत जल्दी स्थिति को संभाल नहीं पाएंगे.