ग्रामीण हॉट्स कृषि मंडियों के रूप में होंगे विकसित: अनुराग ठाकुर

ग्रामीण हॉट्स कृषि मंडियों के रूप में होंगे विकसित: अनुराग ठाकुर

शिमला. सांसद अनुराग ठाकुर गुरुवार को कृषि विज्ञान केंद्र में आत्मा प्रोजेक्ट के तहत आयोजित एक दिवसीय जिला स्तरीय कृषि जागरुकता शिविर में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे. अपने विचार प्रकट करते हुए  उन्होंने कहा कि देश भर में ग्रामीण हॉट्स को ग्रामीण कृषि मंडियों के रूप में विकसित और उन्नत किया जा रहा है. 86 प्रतिशत से अधिक छोटे और सीमांत किसानों के हितों की देख-रेख की जा सके. ई-नाम के साथ इलेक्ट्रॉनिक तौर पर जुड़ी ग्रामीण कृषि मंडियां किसानों को अपना माल सीधे उपभोक्ताओं और बड़े खरीदारों को बेचने की सुविधा भी प्रदान करेगी.

ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत हर खेत को पानी पहुंचाने के लिए पांच वर्षों में पचास हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. इस योजना के तहत 28 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था उपलब्ध करवाई जाएगी. कृषि उत्पाद में बढ़ोत्तरी के साथ किसानों की आमदनी में भी इजाफा हो सके. उन्होंने कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर किसानों को खेती की सिंचाई के लिए सोलर वॉटर पंप लगाने में भी मदद करेगी. किसान समृद्ध होगा तभी सशक्त देश का निर्माण संभव है.

ग्रामीण हॉट्स कृषि मंडियों के रूप में होंगे विकसित: अनुराग ठाकुर-Panchayat Times
ग्रामीणों के साथ अनुराग ठाकुर

केंद्र सरकार ने किसानों की आमदनी दोगुनी करने बहुआयामी लक्ष्य निर्धारित किया है. इसी दिशा में योजनाएं एवं कार्यक्रम भी निर्धारित किए जा रहे हैं. अनुराग ठाकुर ने कहा कि प्रत्येक खेत की मिट्टी की सेहत के आधार पर गुणवत्तापूर्ण बीजों और पोषक तत्वों का प्रावधान किया जा रहा है, मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसानों के लिए काफी लाभकारी सिद्ध हो रहे हैं. इसके साथ ही किफायती लागत पर जोखिम कम करने के लिए नई फसल बीमा योजना तैयार की गई है. किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ उठाना चाहिए.

इस अवसर पर एचआरटीसी के उपाध्यक्ष विजय अग्रिहोत्री ने कहा कि हमीरपुर जिला के किसानों को नकदी फसलों की ओर कदम बढ़ाने चाहिए. हमीरपुर जिला में कृषि की अपार संभावनाएं हैं. कृषि विभाग के अधिकारियों को ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर किसानों की समस्याओं और शिकायतों का त्वरित निवारण सुनिश्चित बनाना चाहिए. किसान सरकारी योजनाओं का सही तरीके से लाभ उठा सकें. किसानों को आधुनिक तकनीक से खेती-बाड़ी के बारे में भी प्रेरित करना जरूरी है. इस क्षेत्र में स्वरोजगार की असीम संभावनाएं हैं.