सरानाहुली मेला: पराशर और कमरूनाग में उमड़ेगा आस्था का सैलाब

पराशर झील और कमरूनाग में दो दिवसीय सरानाहुली मेलों का आयोजन
फाइल फोटो

मंडी. जिला मंडी के दो प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों पराशर झील और कमरूनाग में दो दिवसीय सरानाहुली मेलों का आयोजन 14-15 जून को होने जा रहा है. एक ही दिन मनाए जाने वाले इस सरानाहुली मेले के दौरान पराशर और कमरूनाग में हजारों की तादाद में श्रद्धालओं की भीड़ इन तीर्थ स्थलों पर उमड़ पड़ती है. पराशर में जहां मंडी जिला के अलावा कुल्लू जिला से भी श्रद्धालु आते हैं. वहीं, पर कमरूनाग में मंडी जिला के अलावा बिलासपुर, कांगड़ा, हमीरपुर और प्रदेश के बाहर से भी लोग पैदल यात्रा कर यहां पहुंचते हैं.

पराशर का ऐतिहासिक महत्व

पराशर झील और कमरूनाग में दो दिवसीय सरानाहुली मेलों का आयोजन

महर्षि पराशर ने इस झील के किनारे तपस्या की थी. यहां पर पैगोडा शैली का मंदिर बना हुआ है. कहा जाता है कि मंदिर बनाने वाला कारीगर रात के समय देवदार की लकड़ी का तख्ता साफ करके रखता था. सुबह जब उसे देखते तो उस पर मकड़ी द्वारा कई आकृतियां तैयार की गई होती थी. उन्हीं आकृतियों को कारीगर काष्ठ फलक पर उकेर देता था.

बाणसेन ने की थी मंदिर की स्थापना

पराशर मंदिर का निर्माण तेहरवीं-चौहदवीं शताब्दी के दौरान तत्कालीन मंडी नरेश राजा बाणसेन ने करवाया था. यह तिमंजिला पैगोडा शैली का मंदिर काष्ठकला का उत्कृष्ठ नमूना है. हिस्ट्री ऑफ पंजाब हिल स्टेट्स के भाग दो और पृष्ठ संख्या 377 पर इस बारे में उल्लेख मिलता है. वहीं पर यहां की काष्ठकला के बारे में एंटीक्वीटिज ऑफ हिमाचल के पृष्ठ 54 पर लिखा गया है कि पराशर मंदिर समालंकृत और भव्य बनावट के मंदिरों में से एक है. पराशर मंडी जिला मुख्यालय से लगभग पचास किलोमीटर की दूरी पर उत्तरशाल पर्वत श्रृंखला पर स्थित है. कुल्लू-मनाली जाने वाले सैलानी यहां के लिए मंडी वाया कटौला होते हुए बागी से पराशर वाया रोड पहुंच सकते हैं.

पराशर झील और कमरूनाग में दो दिवसीय सरानाहुली मेलों का आयोजन

कमरूनाग झील में तैरते नोट

महाभारतकालीन राजा रत्न यक्ष जो इस जनपद में बड़ादेव कमरूनाग के नाम से पूजे जाते हैं. मंडी जिला के सराज क्षेत्र में समुद्रतल से लगभग नौ हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित कमरूनाग झील में नकदी और सोना-चांदी चढ़ाने की सदियों से परंपरा रही है. जिसका आज भी 14-15 जून को होने वाले सरानाहुली मेले में निर्वहन किया जाता है. हर साल यहां पर सरानाहुली में मेले में हजारों लोग अपनी मन्नतें लेकर आते हैं. जिनकी मन्नतें पूरी हो जाती हैं. वे झील में अपनी श्रद्धा के अनुसार सिक्के, नोट, सोना-चांदी आदि चढ़ाते हैं.

Saranahuli Mela in Mandi

मेले के दौरान तो झील के तल पर सौ पचास के नोट तैरते रहते हैं. जबकि सोना और अन्य धातु झील में डूब जाती है. सरानाहुली मेले को कमरूनाग झील तक पहुंचने के लिए एक मार्ग मंडी जिला मुख्यालय से चैलचौक वाया धंग्यारा होते हुए है. वहीं, दूसरा मार्ग मंडी-करसोग मार्ग पर रोहांडा से पैदल कमरूनाग तक पहंचा जा सकता है. इसके अलावा चैलचौक-कुकड़ी गलू वाया माता जालपा मंदिर होते हुए भी एक रास्ता है.