नई दिल्ली: शहरी पारिस्थितिकी (Urban Ecology) के “नाज़ुक संतुलन” पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में दिलचस्प और तीखी बहस देखने को मिली। आवारा कुत्तों (Stray Dogs) को हटाने से शहरों में चूहे और बंदरों की संख्या बढ़ने की आशंका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने हल्के-फुल्के अंदाज़ में “और बिल्लियों को बढ़ावा देने” का सुझाव भी दे डाला।
कुत्ते हटे तो बढ़ेंगे चूहे?
आवारा कुत्तों के प्रबंधन पर चल रही स्वत: संज्ञान (Suo Motu) कार्यवाही के दौरान सीनियर एडवोकेट सी.यू. सिंह ने दलील दी कि कुत्तों को अचानक हटाने से “Rodent Menace” और बंदरों की समस्या बढ़ सकती है।
उन्होंने कहा,
“कुत्ते संतुलन बनाए रखते हैं। जब उन्हें हटाया जाता है तो चूहों की संख्या तेज़ी से बढ़ती है, जो बीमारियां फैलाते हैं।”
इस पर जस्टिस संदीप मेहता ने व्यंग्यात्मक लहजे में सवाल उठाया,
“क्या इसका कोई वैज्ञानिक संबंध है? हल्के-फुल्के अंदाज़ में कहें तो कुत्ते और बिल्लियां दुश्मन हैं। चूहों के दुश्मन के तौर पर हमें और बिल्लियों को बढ़ावा देना चाहिए।”
‘Vacuum Effect’ और संस्थानों की सुरक्षा
यह सुनवाई नवंबर 2025 के उस विवादित आदेश के बाद हो रही है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल, अस्पताल और अदालत जैसे High-Footfall Institutions से आवारा कुत्तों को तुरंत हटाने का निर्देश दिया था।
इस आदेश में यह भी कहा गया था कि नसबंदी (Sterilisation) के बाद कुत्तों को उसी जगह वापस न छोड़ा जाए—जो कि Animal Birth Control (ABC) Rules 2023 के खिलाफ बताया जा रहा है।
एनिमल वेलफेयर संगठनों का तर्क है कि ऐसा करने से Vacuum Effect पैदा होता है, यानी खाली इलाकों में नए, बिना टीकाकरण वाले कुत्ते आ जाते हैं।
इस पर जस्टिस मेहता ने स्पष्ट किया,
“हमने हर गली से हर कुत्ते को हटाने का आदेश नहीं दिया है। लेकिन संस्थान सड़क नहीं होते। अस्पताल परिसर में कुत्तों की ज़रूरत क्या है?”
राज्यों की सुस्ती पर कोर्ट नाराज़
एमिकस क्यूरी गौरव अग्रवाल ने कोर्ट को बताया कि 16 राज्यों ने शेल्टर और नसबंदी ढांचे को लेकर हलफनामे दाखिल कर दिए हैं, लेकिन 7 राज्य अब भी पीछे हैं। उत्तर प्रदेश, पंजाब और कर्नाटक जैसे बड़े राज्यों पर अधूरी जानकारी देने और आखिरी वक्त में फाइलिंग करने का आरोप लगा। कोर्ट ने नाराज़गी जताते हुए कहा लोग मर रहे हैं, बच्चों को काटा जा रहा है। हालिया आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि कुछ शहरी इलाकों में बीते दो साल में Dog Bite Cases में 35% तक की बढ़ोतरी हुई है।
मानवीय समाधान बनाम व्यावहारिक ज़रूरत
सुनवाई के दौरान बेंच ने यह तर्क भी खारिज किया कि विशेष शेल्टर “अमानवीय” होते हैं। जब सी.यू. सिंह ने नसबंदी और उसी जगह पुनः छोड़ने (Sterilisation & Re-Release) को सबसे प्रभावी तरीका बताया, तो जस्टिस मेहता ने तीखा सवाल किया,हर अस्पताल में कितने कुत्ते होने चाहिए? हर बेड के पास एक?
नई गाइडलाइंस जल्द
जस्टिस संदीप मेहता, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच इस महीने के अंत तक NHAI और राज्य सरकारों के लिए नई गाइडलाइंस जारी कर सकती है।इनका मकसद एक्सप्रेसवे पर जानवरों से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकना और शहरों में ‘Dog-Free Zones’ को लेकर नियमों को और स्पष्ट करना होगा।
