किसानों के विकास के लिए, पूरी दुनिया से वैज्ञानिक झारखंड पहुंचे

अखिल भारतीय गेहूं और जौ कार्यशाला का आयोजन राजधानी रांची Panchayat Times

रांची. झारखंड में गेहूं और जौ की खेती के उत्पादन को बढ़ाने के लिए लगातार शोध किए जा रहे हैं. इसी को वृहत रूप देने के मकसद से हर वर्ष होने वाले 57वां अखिल भारतीय गेहूं और जौ कार्यशाला का आयोजन राजधानी रांची के कांके स्थित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में इस बार किया गया है. पिछले वर्ष बनारस में इस कार्यशाला का आयोजन किया गया था. राज्य की राज्यपाल ने शनिवार को इसका उद्घाटन किया.

राजधानी रांची के कांके स्थित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय गेहूं और जौ को लेकर तीन दिवसीय राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिको का शोधकर्ता एवं कार्यशाला का उद्घाटन शनिवार को किया गया है. जंहा मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने दीप प्रज्वलन कर इस कार्यशाला का उद्घाटन किया. इस कार्यशाल का मुख्य उद्देश्य गेहूं और जौ की उत्पादकता को झारखंड में बढ़ावा किस तरह से दिया जाए और इसकी खेती में चुनौतियों से कैसे निपटा जाए इस पर चर्चा की जाएगी. इस कार्यशाला में दूसरे देशों के भी वैज्ञानिकों ने शिरकत की है, साथ ही देश भर से आए 300 वैज्ञानिक भी भाग ले रहे हैं.

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इस कार्यक्रम से पूर्व द्रौपदी मुर्मू ने बिरसा कृषि विश्वविद्यालय परिसर में लगे बिरसा मुंडा के प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करना है. जिसमें आ रही चुनौतियों को खत्म कर उनके सपने को पूरा करने का आह्वान किया है.

उन्होंने कहा कि राज्य में गेहूं और जौ की उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सकता है. किसानों के बेहतर भविष्य के लिए राज्य सरकार भी उनका साथ देगी.

मेक्सिको, अमेरिका, नेपाल और भूटान से आए वैज्ञानिक

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्रा ने बताया कि देश के साथ-साथ विदेश से भी वैज्ञानिक इस कार्यशाला में हिस्सा ले रहे हैं. मेक्सिको, अमेरिका, नेपाल और भूटान से आए वैज्ञानिक भी गेहूं और जौ के उत्पादन क्षमता को बढ़ाने और आने वाली चुनौतियों से निपटने को लेकर इस कार्यशाला में शामिल हुए हैं. उन्होंने बताया कि गेहूं की फसल में कई बीमारियां चुनौती के रूप में सामने आ रही हैं लेकिन उसके निदान के लिए भी भारतीय कृषि वैज्ञानिक लगातार शोध कर रहे हैं और उसे खत्म करने का प्रयास कर रहे हैं.

किसानों की आय दोगुनी करने का सपना

राज्यपाल ने कहा कि इस कार्यशाला में विशेष रूप से झारखंड राज्य में गेहूं और जौ की खेती में आने वाली समस्याओं के निदान पर चर्चा की जाएगी. उन्होंने बताया कि देश में 1950- 52 में 11 मिलियन टन ही गेहूं का उत्पादन होता था लेकिन वर्तमान समय में यह आंकड़ा 100 मिलियन टन तक पहुंचने वाला है. फिलहाल 98 मिलियन टन गेहूं उत्पादन हो रहा है. प्रधानमंत्री का 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का सपना साकार हो सकता है लेकिन उसके लिए सभी सुविधाएं मुहैया होनी चाहिए और उस सपने को पूरा करने के लिए उदाहरण के तौर पर कुछ गांव में काम भी चल रहा है.