आईआईटी मंडी का कई प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों से शोध करार

आईआईटी मंडी का कई प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों से शोध करार-Panchayat Times
साभार इंटरनेट

मंडी. आईआईटी मंडी के शोध एवं विकास कार्यों के सात प्रोजेक्ट केंद्र सरकार की विशेष पहल के तहत चुने गए हैं. जिसका मकसद अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों से सहयोग करार को बढ़ावा देना है. भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने स्कीम फाॅर प्रमोशन ऑफ एकेडेमिक एंड रिसर्च कोलैबोरेशन स्पार्क के तहत संस्थान के इन शोध प्रस्तावों को स्वीकार किया है. जिनमें संस्थान के शिक्षकों के नेतृत्व में आयोजित ये प्रोजेक्ट ऊर्जा एवं जल स्थिरता, आधुनिक सेंसर, इलैक्ट्रॉनिक्स एवं संचार,संक्रामक बीमारियां एवं क्लिनिकल शोध, मानवीकी एवं समाज विज्ञान, नैनो बायोटेक्नोलॉजी एवं उपयोग,आधुनिक कार्यपरक एवं मेटा मटीरियल्स और मौलिक विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से शोध संबंधित हैं.

स्पार्क के अनुदान से आईआईटी मंडी को अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, यूके और ताइवान के विश्वविद्यालयों से करार करने में मदद मिलेगी. इसके अलावा विश्व स्तरीय शिक्षकों और शोधकर्ताओं के साथ साझा शोध करने की सुविधाएं मिलेंगी। वहीं, विद्यार्थियों के लिए छोटी अवधि के संबंधित कोर्स शुरू किए जा सकेंगे.

आईआईटी मंडी के डीन डा. प्रेम फेलिक्स सिरिल का कहना है कि ये प्रोजेक्ट पूरी दुनिया के प्रमुख विश्वविद्यालयों से साझेदारी करने में हमारा हौसला बुलंद करेंगे. इसके साथ ही आईआईटी मंडी बतौर नोडल संस्थान जर्मनी के शिक्षा संस्थानों से सहयोग करार कर स्पार्क स्कीम में योगदान देगा.

डाॅ. रजनीश गिरी, एसिस्टेंट प्रोफेसर स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज़, आईआईटी मंडी एवं डा. संजीव कुमार सिंह अलगप्पा युनिवर्सीटी, तमिलनाडु को उनके शोध के लिए स्पार्क अनुदान दिया गया है. वहीं बायोफि जिक्स ऑफ जीका वायरस आन्वेलप प्रोटीन, मेम्ब्रेन फ्यूजऩ और इनहिबिटर डिस्कवरी पर इस शोध में प्रो. इंदिरा यू. मैसूरकर, वाशिंग युनिवर्सीटी, सेंट लुइस, अमेरिका प्रधान परीक्षक एवं प्रो. व्लादिमीर उर्वस्की, युनिवर्सीटी ऑफ साउथ फ्लोरिडा, अमेरिका सह-परीक्षक सहयोग देंगे.

यह शोध मुख्यत यह समझने पर ध्यान केंद्रित करेगा कि जीका वायरस मेम्ब्रेन किस तरह होस्ट मेम्ब्रेन से फ्यूज़ करता है। इस करार से आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं को वाशिंग युनिवर्सीटी, सेंट लुइस, अमेरिका स्थित जीका वायरस कल्चर लैबरोटरी उपयोग करने की सुविधा होगी. वहीं डा. प्रेम फेलिक्स सिरिल, एसोसिएट प्रोफेसर, स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज़, आईआईटी मंडी प्रधान परीक्षक और डाॅ. सुमन कल्याण पाल, एसोसिएट प्रोफेसर, स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज़, आईआईटी मंडी सह परीक्षक को उनके शोध के लिए 60 लाख रुपए का स्पार्क अनुदान मिला है.