झारखंड : मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के आदेश के बाद पूर्वी सिंहभूम जिले के सूर्याबेड़ा गांव में लौटी उम्मीद, बिजली आई, बच्चों को शिक्षा से जोड़ा गया, लोगों को रोजगार भी मिला

झारखंड : मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के आदेश के बाद पूर्वी सिंहभूम जिले के सूर्याबेड़ा गांव में लौटी उम्मीद, बिजली आई, बच्चों को शिक्षा से जोड़ा गया, लोगों को रोजगार भी मिला - Panchayat Times
Children studying in Suryabeda village

रांची/जमशेदपुर. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के आदेश के बाद पूर्वी सिंहभूम जिले के मुसाबनी प्रखंड मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर घने जंगल और पहाड़ की तलहटी में बसे सूर्याबेड़ा गांव में एक नई रोशनी आई है.

झारखंड : मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के आदेश के बाद पूर्वी सिंहभूम जिले के सूर्याबेड़ा गांव में लौटी उम्मीद, बिजली आई, बच्चों को शिक्षा से जोड़ा गया, लोगों को रोजगार भी मिला - Panchayat Times

सूर्याबेड़ा गांव में 52 परिवार आजादी के सात दशक बाद भी विकास योजनाओं से वंचित थे. ग्रामीणों को मुख्यधारा से जुड़ने में आनेवाली समस्याओं को देखते हुए मुख्यमंत्री ने पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त को आवश्यक निर्देश दिया था.

बिजली आई होने लगी पढ़ाई

सूर्याबेड़ा गांव में शाम होने के बाद अंधकार में समा जाता था तथा जहां ढिबरी-बाती ही रात में पढ़ाई करने के लिए बच्चों के पास एकमात्र विकल्प था, उस गांव में बिजली पहुंचने से बच्चे बल्ब की रोशनी में पढ़ाई कर पा रहें हैं. ग्रामीण कहते हैं कि बिजली पहुंचने से पहले संध्या होने के बाद न तो कोई ग्रामीण गांव से निकलना चाहता था और ना ही कोई प्रखंड मुख्यालय से गांव की ओर आता था.

झारखंड : मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के आदेश के बाद पूर्वी सिंहभूम जिले के सूर्याबेड़ा गांव में लौटी उम्मीद, बिजली आई, बच्चों को शिक्षा से जोड़ा गया, लोगों को रोजगार भी मिला - Panchayat Times
Children studying in Suryabeda village

गांव में बिजली पहुंचने से पहले शाम ढलते ही सभी लोग अपने-अपने घरों में कैद होने को विवश थे, लेकिन अब स्ट्रीट लाईट लग जाने से बच्चे-बुजुर्ग सभी रात में भी घर के बाहर बैठकर एक दूसरे के साथ समय व्यतीत कर पाते हैं.

प्रतिदिन 30 मानव दिवस का सृजन

ग्रामीणों को प्रतिदिन 30 मानव दिवस का सृजन करते हुए ग्रामीणों को मनरेगा योजना में रोजगार उपलब्ध कराया गया है. गांव में सिंचाई कूप, चापाकल, विधायक निधि से 1,500 फीट पीसीसी पथ का निमाण पूर्ण हो गया है. वहीं 500 फीट का पीसीसी पथ भी 15वें वित्त आयोग से स्वीकृत है. मनरेगा के तहत पशु शेड निर्माण का भी लाभ ग्रामीणों को दिया गया है.

सड़क की हालत भी सुधरी

सूर्याबेड़ा गांव तक जानेवाली सड़क का निर्माण लगभग पूरा हो गया है. पेजयल की समस्या को देखते हुए डीप बोरिंग, चापाकल एवं सिंचाई कूप का निर्माण मनरेगा योजना के अन्तर्गत कराया गया है. दीदीबाड़ी योजना के अन्तर्गत उक्त गांव में सब्जी की खेती भी कराई जा रही है. रोजगार के लिए सभी ग्रामीणों का मनरेगा के तहत जॉब कार्ड बनाया गया है, ताकि सभी को अपने पंचायत एवं गांव में ही रोजगार मिल सके.

बच्चों को शिक्षा से जोड़ा गया

सूर्याबेड़ा गांव के करीब 60 फीसदी बच्चों को कस्तूरबा विद्यालय में नामांकन कराते हुए उच्च शिक्षा से जोड़ा गया है. साथ ही, वर्तमान में गांव में ही रहकर पढ़ाई करने वाले बच्चों के लिए खेल प्रतियोगिता की शुरूआत की गई, जो समय-समय पर करायी जा रही है.