बीसलपुर बांध में पानी बस फरवरी तक, अजमेर की प्यास ऐसे बुझेगी

अजमेर. अजमेर शहर में एक सप्ताह में तीन बार जलापूर्ति की जाएगी. अजमेर शहर में जलापूर्ति के लिए 48 एवं 72 घण्टे के चक्र तैयार किए गए हैं. इसके तहत एक स्थान पर दो बार 48 घण्टों एवं तीसरी बार 72 घण्टे में जलापूर्ति की जाएगी. इसके बाद फिर से दो बार 48 और तीसरी बार 72 घण्टे के चक्र लागू होंगे. यह सभी क्षेत्रों में समान रूप से लागू किया जाएगा. जलापूर्ति एक घण्टे तक पूरे प्रेशर के साथ की जाएगी.

इस मानसून में औसत से 11 प्रतिशत कम एवं छितरायी हुई बारिश के कारण बीसलपुर बांध में सामान्य से कम पानी आया है. कम पानी की आवक से उपजे पेयजल संकट से निपटने के लिए प्रशासन ने आपदा प्रबंधन योजना तैयार कर ली है. इसके लिए इस योजना पर त्वरित गति से काम भी शुरू कर दिया गया है. जिले को शीघ्र ही योजना का लाभ भी मिलने लगेगा. जिला प्रशासन और जलदाय विभाग के अधिकारियों ने आमजन से भी पेयजल संकट के इस दौर में पानी का मितव्ययता से उपयोग कर सहयोग की गुजारिश की है.

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जलदाय विभाग के अधीक्षण अभियंता सत्येंद्रसिंह ने बताया कि अजमेर शहर को 125 एमएल के स्थान पर 20 प्रतिशत कटौती के पश्चात 100 एमएल पानी मिल रहा है. 125 एमएल पानी मिलने की स्थिति में 48 घण्टे के अन्तराल से अजमेर शहर में पानी सप्लाई किया जा रहा है. वर्तमान में अजमेर शहर से विभाग के 9 उपखण्डों द्वारा पानी वितरण का कार्य किया जाता है. रोजाना 100 एमएल पानी से भी सप्लाई अन्तराल 48 घण्टे ही रखा जाना प्रस्तावित है किन्तु रोजाना प्रत्येक 2 उपखण्ड के क्षेत्र में एक दिन सप्लाई बन्द रहेगी.

इस प्रकार अजमेर शहर में 2 सप्लाई 48 घण्टे के अन्तराल से एवं तीसरी सप्लाई 72 घण्टे के अन्तराल से पूर्व की भांति निर्धारित समय पर 50 मिनट के लिये की जावेगी और यही क्रम आगे लगातार जारी रहेगा. जलदाय विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में 923 एमएलडी पानी की आपूर्ति प्रतिदिन की जा रही है. यह जारी रहे तो बांध में सिर्फ 28 फरवरी 2019 तक का जल उपलब्ध है. विभाग ने 20 प्रतिशत कटौती कर 689 एमएलडी जलापूर्ति प्रतिदिन करना तय किया है. इससे 15 अप्रेल 2019 तक जल उपलब्धता रहेगी. इसी तरह आगामी दिनों में 50 प्रतिशत कटौती की योजना है. बांध से 450 एमएलडी पानी आपूर्ति होने पर 31 जुलाई तक पेयजल की उपलब्धता रहेगी.

वैकल्पिक स्त्रोतों से पानी लेने में होंगे 4 माह में 189.61 करोड़ रुपए—

जिले में पेयजल के वैकल्पिक स्त्रोतों को तैयार करने के लिए जलदाय विभाग ने 189.61 करोड़ की योजना तैयार की है. इससे प्रतिदिन 68 एमएलडी पानी उपलब्ध हो सकेगा. विभाग आगामी तीन महीनों में 498 सिंगल फेस ट्यूबवेलों को पुन: शुरू करेगा. जो अब तक बंद पड़े थे. इस पर 7.52 करोड़ रुपए खर्च होंगे. इसी तरह 16.1 करोड़ की लागत से 1516 नए हैण्डपम्प खोदे जाएंगे. इस काम में 4 महीने लगेंगे. इसी तरह 88.75 करोड़ की लागत से 410 नए खुले कुओं एवं ट्यूबवैलों का निर्माण आगामी 4 माह में कराया जाएगा. विभाग ने आगामी 2 महीनों तक 19.73 करोड़ की लागत से निजी स्त्रोतों से टैंकरों द्वारा जल परिवहन तथा 57.60 करोड़ की लागत से 2 महीने में ट्रेन से जल परिवहन की योजना तैयार कर ली है.

यह है वर्तमान स्थिति—

– बीसलपुर बांध का पूर्ण भराव स्तर – 315.50 मीटर
– सिंचाई के लिए पानी लेने का न्यूनतम स्तर – 310.60 मीटर
– कुल भराव क्षमता – 38.70 टीएमसी
– उपयोग में लेने योग्य क्षमता – 33.15 टीएमसी
– अजमेर जिले के लिए आरक्षित जल – 5 टीएमसी
– जयपुर और टोंक जिले के लिए आरक्षित जल – 11.2 टीएमसी
– सिंचाई के लिए आरक्षित जल – 8 टीएमसी
– भाप एवं अन्य नुकसान – 8.95 टीएमसी
– बांध में इन जिलों से आता है पानी – भीलवाड़ा, चितौड़गढ़, राजसमंद, उदयपुर, टोंक एवं अजमेर
– बांध में इन नदियों से आता है पानी – बनास, गम्भीरी, वागन, बेड़च, मेनाल, कोठारी, खारी एवं डाई
– बांध से लाभान्वित अजमेर के कस्बे – 8
– बांध से लाभान्वित जिले के गांव – 1111

जनप्रतिनिधियों ने यह कहा पेयजल आपुर्ति समय निर्धारित हो—

पेयजल में जो भी कटौती की जानी है एक बार कर दी जाये. इसके साथ ही पेयजल वितरण का अंतराल समय भी निर्धारित किया जाना चाहिए. भांवता, गनाहेडा सहित स्थानीय पेयजल के पुराने स्त्रोत डिग्गी तालाब की भी सफाई करवा उसका उपयोग करने का भी सुझाव दिया.
धर्मेन्द्र गहलोत— महापौर,अजमेर

प्रभावी मोनिटरिंग हो—

पेयजल वितरण की प्रभावी मोनिटरिंग किये जाने की जरूरत है. पूर्व में ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग पांच सौ हैण्डपंप लगाये गये थे जो विद्युतीकृत थे. उन्हें पुनः प्रारंभ किया जाकर उन पर यदि आरओ लगा दिये जाये तो ग्रामीण जनता को पेयजल की काफी राहत मिलेगी. भांवता एवं बुढ़ा पुष्कर के पेयजल स्त्रोत को संधारित करने की भी आवश्यकता है.                दीनबंधु चौधरी— प्रधान संपादक, दैनिक नवज्योति

प्रत्येक नागरिक ले जल बचाने का प्रण

जिले का प्रत्येक नागरिक इस बात का प्रण करे कि वह अगले मानसून तक प्रतिदिन जल बचाएगा. प्रत्येक व्यक्ति जल के कम से कम उपयोग के बारे में जागरूक होगा. बर्तन धोने, आंगन धोने, शौचालय में उपयोग, रसोई में उपयोग एवं अन्य उपयोगों में मितव्यतता बरत कर जल संरक्षण में हरएक जन सहयोग कर सकते हैं. जिन संस्थानों एवं भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम है, वहां उस पानी का उपयोग किया जाए. हम यह तय कर लें कि कम पानी की उपलब्धता के कारण हम जल बचाकर अपने कर्तव्य का निवर्हन करेंगे.
आरती डोगरा— जिला कलक्टर