शीतलनाथ भगवान की गर्भ-जन्म भूमि भदलपुर, हिंदू और बौद्ध धर्मावलंबियों का एक बड़ा तीर्थस्थल

श्री 1008 शीतलनाथ भगवान की गर्भ-जन्म़ भूमि भदलपुर हिंदू और बौद्ध धर्मावलंबियों का एक बड़ा तीर्थस्थल - Panchayat Times

रांची/चतरा. 10वें तीर्थंकर श्री 1008 शीतलनाथ भगवान की गर्भ-जन्म कल्याणक भूमि है भदलपुर (इटखोरी). यहां की पावन धरा का कण-कण पवित्र है. दसवें तीर्थंकर की जन्म और तप-ज्ञान कल्याणक भूमि पर शीश टेकने वालों का जीवन धन्य हो जाता है. भगवान शीतलनाथ का जन्म माघ कृष्ण द्वादशी (21 जनवरी) को हुआ था.

यह दिन न केवल जैन धर्मावलंबियों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि झारखंड के लिए भी खास है. क्षेत्र की खुदाई से प्राप्त तीर्थंकर की प्रतिमाओं और अवशेषों से यह सिद्ध हो चुका है कि चतरा में आज का भदुली ही भदलपुर है, जो दसवें तीर्थंकर की गर्भ-जन्म कल्याणक भूमि है.

भदुली से सटे कोल्हुआ पहाड़ (कौलेश्वरी पर्वत) पर उन्होंने तप किया था और पाैष कृष्ण चतुर्दशी को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी. श्री सम्मेद शिखर (पारसनाथ) में आश्विन शुक्ल अष्टमी तिथि को उन्होंने मोक्ष प्राप्त किया था. भदलपुर हिंदू और बौद्ध धर्मावलंबियों का भी तीर्थस्थल है. यहां देवी काली का जग विख्यात मंदिर है. विश्व में यह मां काली का एकमात्र मंदिर है, जहां बलि नहीं होती.

कदाचित् यह भगवान श्री शीतलनाथ की जन्मस्थली होने के कारण ही अहिंसक क्षेत्र है. यहां के प्राचीन कीर्ति स्तंभ पर भी जैन, हिंदू और बौद्ध धर्माें के उल्लेख हैं. जैन धर्म में तीर्थंकर वे कहलाते हैं जो तप से आत्मज्ञान प्राप्त करते हैं. जिन्होंने क्रोध, अभिमान, छल, इच्छा पर विजय प्राप्त की हो. भगवान शीतलनाथ जी वर्तमान अवसर्पिणी काल के दसवें तीर्थंकर हैं.