सोशल मीडिया पर ट्रोल होने वालों की मदद करते हैं ये ग्रुप्स

मीना डेन्नर्ट (Mina Dennert) ने इस परेशानी को समझा और एक फेसबुक ग्रुप बनाया

नई दिल्ली. सोशल मीडिया पर महिलाएं ही ज्यादा ट्रोल होती हैं. उनको तुरंत कई तरह के सर्टिफिकेट्स दे दिए जाते हैं. बरखा दत्त जैसी पत्रकारों को कितनी बार ट्रोल किया गया है इसकी गिनती मुश्किल है. स्वीडिश महिला मीना डेन्नर्ट (Mina Dennert) ने इस परेशानी को समझा और एक फेसबुक ग्रुप बनाया जिसका काम है, उन लोगों की परेशानियों को दूर करना जो सोशल मीडिया पर ट्रोल का शिकार हो रहे हैं. जिनके कमेंट्स बॉक्स गालियों से भरे रहते हैं. और उनका गुनाह होता है किसी मुद्दे पर उनकी राय या उनका दृष्टिकोण. सवाल बस एक ही है कि जब सोशल मीडिया बना ही इसलिए है कि ताकि लोग अपनी राय को समाज के सामने रख सके तो इसमें कुछ लोगों को इतनी परेशानी क्यों हो जाती है. मीना का मानना है कि सोशल नेटवर्क पर फेक न्यूज और अपमान जनक बहस का कोई स्थान नहीं होना चाहिए. इंटरनेट उपयोगकर्ता कभी-कभी बहुत आक्रामक होते हैं: भावनाएं तथ्यों से आगे निकल जाती हैं. उसके बाद वाद-विवाद की जगह ट्रोल करना प्रमुख हो जाता है.

सोशल मीडिया एक हथियार है जिसका इस्तेमाल अच्छे और बुरे दोनों कामों के लिए होता है. इस दुनिया की फितरत है कि जो भी लोग भीड़ से हटकर बात करते हैं उन्हें पागल करार कर दिया जाता है. सोशल मीडिया में भी ऐसी ताकते हैं जो आपको ट्रोल करने के लिए जीजान से जुटी होती है. आपको गालियां देती है और किसी भी मुद्दे पर आपको घेर सकती है. आपके कमेंट्स बॉक्स को इतना गंदा बना सकती है कि उसमें अच्छे कंमेट्स को ढूंढ पाना मुश्किल हो जाता है. क्या इसीलिए सोशल मीडिया का जन्म हुआ था ? नहीं गालियों की जगह सभ्य समाज में नहीं हो सकती. सोशल मीडिया भी एक ग्लोबल समाज ही है.

मीना डेन्नर्ट (Mina Dennert) ने इस परेशानी को समझा और एक फेसबुक ग्रुप बनाया

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इस स्वीडिश महिला को भी काफी ट्रोल किया गया. जब इन्होंने समाज को आइना दिखाना शुरू किया तो इनको भी काफी गालियां सुननी पड़ी. पर इन्होंने गालियों की परवाह न करते हुए अपने इस अभियान में लगी रही. आज लगभग 75 हजार मेंबर्स हैं उनके इस #jagärhär ग्रुप में. जो सोशल मीडिया पर लोगों की मदद करते हैं. इनका काम है उन लोगों के सपोर्ट में कमेंट्स करना है जो लोग किसी भी कारण से काफी ट्रोल किए जा रहे हैं. इनका मानना है कि बेशक किसी का मत गलत है पर उनकी बात सुनी जानी चाहिए. चर्चा, बातचीत या वाद-विवाद चलते रहने चाहिए. गालियों से या ट्रोल करके किसी वाद-विवाद की दिशा को नहीं मोड़ना चाहिए. इसलिए इनका ग्रुप सही आंकड़े लाता है और कमेंट्स का जवाब कमेंट्स से ही दिया जाता है. वाद-विवाद को फिर से जिंदा कर दिया जाता है.

भारत में भी अब इस तरह की पहल की जा रही है. #jagärhär के तो दुनिया भर में सिस्टर ग्रुप्स बन गए हैं. जो सोशल मीडिया को ज्यादा सोशल फ्रेंडली बना रही है. वहीं इसी तरह की मुहिम भारत में बड़े स्तर पर #IAmHere जैसे ग्रुप्स और सोशल मीडिया मैटर्स, प्लक टीवी जैसी ऑर्गनाइजेशन चला रही है. सोशल मीडिया को एक बेहतर प्लेटफॉर्म बनाने की कवायद को अब और तेज किया जा रहा है. भारत के लिए इस तरह के कदम इसलिए भी जरूरी हैं क्योंकि लोकसभा चुनाव सर पे है. कई लोगों को टारगेट करके ट्रोल किया जा रहा है, जिसमें लगाम लगनी चाहिए.