वीआईपी मरीजों के लिए सोलन अस्पताल ने खरीदी लाखों की एम्बुलेंस

सैंज घाटी में हुई सड़क दुर्घटना में नन्हे बच्चे की जान चली गई जबकि एम्बुलेंस
प्रतीक चित्र

सोलन. सोलन का अस्पताल हमेशा विवादों में ही रहा है. अब अस्पताल में एक और विवाद एम्बुलेंस के कारण खड़ा हो गया है. ऐसे तो अस्पताल में कई एम्बुलेंस हैं. लेकिन इस एम्बुलेंस को विशेष तौर पर वीआईपी मरीजों के लिए खरीदा गया है. सूत्रों की माने तो वीआईपी एम्बुलेंस खरीदने के लिए नियमों की ठीक से पालना भी नहीं की गई. वाहन की खरीद फरोख्त ई टेंडरिंग के माध्यम से होनी चाहिए थी. वह भी सीधे तौर पर खरीद ली गई. अब यह ऐसा क्यों हुआ यह एक जांच का विषय है.

वैसे बताया जा रहा है कि आरकेएस की मीटिंग में इनोवा एम्बुलेंस खरीदने का प्रस्ताव रखा गया और उसी प्रस्ताव के आधार पर यह लग्जरी एम्बुलेंस खरीद ली गई. जब इस बारे में एम्एस से पूछा गया तो उन्होंने इस बारे में कैमरे पर कहने से मना कर दिया और वीआईपी कल्चर को बढ़ाने के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि यह प्रश्न आप सरकार से ही पूछें तो बेहतर है. इस बारे में वह कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते. उन्होंने यह तक कह डाला की वीआईपी कल्चर का अगर आप प्रश्न करना चाहते है तो सेक्टरी हेल्थ या प्रदेश सरकार से करें और यह तक कहा की वीआईपी कल्चर खत्म नहीं हो सकता.

इस वीआईपी कल्चर को लेकर स्थानीय लोगों ने एतराज जताया को कहा कि आर के एस के पैसों का स्वास्थ्य विभाग दुरुपयोग कर रहा है. यही नहीं वीआईपी एम्बुलेंस के नाम पर लाखों की सबसे महंगी गाड़ी खरीद ली गई है. उन्होंने आरोप लगाया कि जहां प्रदेश सरकार वीआईपी कल्चर को खत्म करने की बात कह रही है. वहीं, अधिकारी वीआईपी के नाम पर फिजूल खर्ची कर रहे है.

उन्होंने कहा कि अगर यही पैसा जरुरी मशीने खरीदने पर लगाया होता तो आज रोगियों के हित में होता. उन्होंने कहा सोलन अस्पताल में चिकित्सकों की कमी चल रही है. एक्सरे और दूसरी टेस्ट की मशीने खराब पड़ी है. लेकिन अस्पताल प्रशासन वीआईपी एम्बुलेंस खरीद रहा है जो सोलन की जनता के हित में नहीं है.

आपको बता दें कि हिमाचल में सोलन एक मात्र ऐसा जिला है. जहां यह वीवीआईपी इनोवा एम्बुलेंस खरीदी गई है मजे की बात यह है कि सोलन अस्पताल में डाॅक्टर तो नहीं है लेकिन वीवीआईपी एम्बुलेंस जरुर है. जिस पर करीबन 16 लाख रुपए खर्च किए गए हैं. यह वीवीआईपी सुविधा अभी शिमला में भी उपलब्ध नहीं है.