नई दिल्ली. कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सोमवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि संसद के विशेष सत्र का असली मुद्दा महिला आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन (Delimitation) है। उन्होंने इसे राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और “संविधान पर हमला” करार दिया।
सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया से लोकसभा की संरचना में असंतुलन पैदा हो सकता है और इसे राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह कदम लोकतांत्रिक और क्षेत्रीय संतुलन के खिलाफ होगा।
जाति जनगणना को टालने का भी आरोप लगाया
उन्होंने केंद्र सरकार पर जाति जनगणना को टालने का भी आरोप लगाया और कहा कि सरकार इस मुद्दे पर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है। सोनिया गांधी ने दावा किया कि सरकार की मंशा जाति जनगणना और जनगणना प्रक्रिया को और आगे खिसकाने की है।
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि 2023 में पारित “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” में पहले ही प्रावधान था कि महिला आरक्षण जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होगा, लेकिन अब सरकार इसे 2029 से लागू करने की बात कर रही है।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर बदलाव करना ही था तो प्रधानमंत्री को इतना समय क्यों लगा और विशेष सत्र को कुछ हफ्ते बाद क्यों नहीं बुलाया जा सकता था।
सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर “राजनीतिक लाभ लेने” और विपक्ष को दबाव में लाने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार का रवैया “एकतरफा” और “माय वे ऑर हाईवे” जैसा है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब 16 से 18 अप्रैल तक संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र होने वाला है, जिसमें महिला आरक्षण कानून के संशोधन पर चर्चा की जाएगी।
