दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल के अंतर्गत पांच जिले आते हैं, रांची, खूंटी, सिमडेगा, गुमला और लोहरदगा. यह रांची जिले को छोड़ दें तो  चार जिले मुख्यतः आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है जिसमें उरांव और मुंडा आदिवासी समुदाय की संख्या सबसे अधिक है. झारखण्ड की राजधानी रांची इसी प्रमंडल के अंतर्गत आती है.

औद्योगिक दृष्टिकोण से यह प्रमंडल काफी महत्पूर्ण है. रांची में ही भारी लौह उद्योग का कारखाना एचइसी ( हेवी इंजीनियरिंग कारपोरेशन) है. दूसरी तरफ लोहरदगा में बॉक्साइट के माइनिंग के लिए मशहूर है.  वहीँ अन्य जिलों में कोई भी बड़ा उद्योग या माइनिंग नहीं है. खूंटी जिले के उलीहातू गाँव भगवान बिरसा मुंडा का जन्मस्थल है जिन्होंने के आजादी के समय अंग्रेजों के खिलाफ उलगुलान आन्दोलन का नेतृत्व कर उनसे लोहा लेने की कोशिश की थी. आदिवासी समाज में आज इन्हें भगवान की तरह पूजा जाता है. सिमडेगा झारखण्ड राज्य का एक ऐसा जिला है जहाँ पर आदिवासी जनजाति की संख्या सबसे ज्यादा 71 प्रतिशत है, तथा इस जिले से ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बॉर्डर जुड़े हुए हैं. इस प्रमंडल के अंतर्गत मुख्य धार्मिक स्थल रामरेखा धाम, टांगीनाथ, जगन्नाथ मंदिर और पहाड़ी मंदिर है, वहीँ इस क्षेत्र अपने वाटरफॉल के लिए भी मशहूर है, यहाँ पर जोन्हा. और दसम जैसे काफी अच्छे वाटर फॉल हैं.

राजनीतिक दृष्टिकोण की बात करें तो इस प्रमंडल के अंतर्गत 3 लोकसभा और 15 विधानसभा क्षेत्र आते हैं, जिसमें 2014 में हुए लोकसभा चुनावों में भाजपा को तीनों सीटों पर जीत मिली थी, वहीँ साल में अंत में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा को आठ सीटों में जीत मिली मिली थी और तमाड़ और लोहरदगा सीट पर एनडीए की सहयोगी दल आजसू को जीत मिली थी, वहीँ सिल्ली विधानसभा सीट आजसू के मुखिया सुदेश कुमार महतो को हार का सामना करना पड़ा था.