धुंदला और मदनपुर पंचायतों के ‘खास बाड़’ ने दिलाई बंदरों के आतंक से मुक्ति

ऊना(चिंतपूर्णी).  जिले में गत दो सालों में वन आवरण में 27 सौ हैक्टेयर की वृद्धि दर्ज हुई है. रिपोर्ट-2017 के अनुसार वन आवरण बढक़र 55 हजार 600 हैक्टेयर तक पहुंच गया है. उपायुक्त विकास लाबरू ने ऊना में प्रेस को संबोधित करते हुए बताया कि वर्तमान में जिला ऊना में 21 हजार 249 हैक्टेयर क्षेत्र वन विभाग के अधीन है जिनमें चार हजार 453 हैक्टेयर रिजर्व फॉरेस्ट, 12 हजार 405 सीमांकित तथा चार हजार 390 हैक्टेयर अन डिमार्केटिड वन क्षेत्र शामिल हैं. उन्होंने कहा कि धुंदला और मदनपुर पंचायतों में बंदरों के आतंक से मुक्ति मिली है.

उन्होंने बताया कि भारत वन अधिनियम-1927 की धारा 52 के अंतर्गत वन विभाग ने जिला में 133 मौछे खैर, 145 बैग लगभग 43 क्विंटल रखाल तथा आठ वाहनों को पकड़ा है जो गत साल के मुकाबले लगभग 62 प्रतिशत अधिक है. इसी वन मंडल के अधीन जहां सरकारी भूमि में अवैध तौर पर 111 पेडों तथा निजी भूमि में 611 पेड़ों के काटने की घटनाओं को पकड़ा है जो गत साल के मुकाबले जहां सरकारी भूमि में यह आंकडा 70 प्रतिशत तथा निजी भूमि में 56 प्रतिशत की कमी आई है. इसके अलावा वन विभाग की ओर से तीन तेंदुओं को सफलतापूर्वक बचाव किया गया है.

318 हैक्टेयर भूमि में लगे तीन लाख 24 हजार पौधे
विकास लाबरू ने बताया कि जिला में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से 318 हैक्टेयर भूमि में 3 लाख 24 हजार पौधों को रोपित किया गया है. उन्होने बताया कि वन्य जीव संरक्षण अधिनियम-1972 के तहत पंचायत स्तर पर जन जागरूकता अभियान चलाया गया तथा लोगों को विभिन्न माध्यमों से जागरूक किया गया. उन्होंने बताया कि जागरूकता अभियान के परिणामस्वरूप जंगलों में कड़ाकी लगाने के मामलों में कमी दर्ज हुई है तथा इस संबंध में कडाकी लगाने पर दो लोगों को विभाग की ओर से रंगे हाथ पकड़ा भी गया है.

वेस्ट इंजन ऑयल तथा मिर्ची पाऊडर युक्त बाड़ से जंगली जानवर पर नियंत्रण

उन्होंने बताया कि विभागीय अधिकारियों की ओर से मनुष्य और जंगली जानवरों के मध्य होने वाली टकराव की घटनाओं को कम करने के लिए जिला के विभिन्न स्थानों पर वेस्ट इंजन ऑयल तथा मिर्ची पाऊडर युक्त बाड़ पर भी प्रयोग किया गया है जिसके सार्थक परिणाम सामने आए हैं. उन्होने बताया कि इस तकनीक के माध्यम से जिला की दो पंचायतों धुंदला और मदनपुर में यह प्रयोग किया गया जिसके तहत लोगों को बंदरों के व्यवहार, किचन से निकलने वाले कचरा प्रबंधन के साथ-साथ लोकल गन के बारे भी जागरूक किया गया जो बंदरों को भगाने में मददगार साबित हुई है.

इसके अलावा वनों की आग बारे लोगों को जागरूक करने के लिए वन मंडल ऊना में 20 मार्च से वन अग्रि जागरूकता अभियान को जिला के पीपलू गांव से प्रारंभ किया गया है. उन्होने बताया कि इस अभियान के माध्यम से लोगों को वनों की आग बारे जागरूक किया जा रहा है.

टोल फ्री नम्बर-18001808097 पर दें आग लगने की जानकारी

उन्होंने कहा कि भारतीय वन अधिनियम-1927 के तहत वनों पर आग लगाना कानूनी जुर्म है तथा आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है. इसके अलावा ऊना की सभी पंचायतों में वन कर्मियों के माध्यम से जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा तथा वन आग की घटनाओं से निपटने के लिए स्वयं सेवकों को भी जोड़ा जा रहा है.

इसके अलावा स्कूलों के माध्यम से भी व्यापक जन जागरूकता लाई जा रही है तथा कहीं पर भी वन आग की घटना होने पर टोल फ्री नम्बर-18001808097 पर जानकारी दी जा सकती है.

वन मंडल को मिलेंगे ट्रांक्लाईजर गन
वन मंडलाधिकारी यशुदीप सिंह ने सभी का स्वागत किया तथा विभाग के माध्यम से चलाई जा रही विभिन्न गतिविधियों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की.

उन्होने बताया कि विभाग की ओर से वन मंडल को जल्द ही ट्रांक्लाईजर गन उपलब्ध करवा दी जाएगी. उन्होने बताया कि विभाग द्वारा रात्रि के समय वन कर्मियों को अकेले के बजाए समूह में गश्त करने के निर्देश दे दिए गए हैं ताकि कोई अप्रिय घटना न हो. उन्होने बताया कि सरकार ने बंदर पकडने के लिए ईनाम राशि रखी जिसे कोई भी व्यक्ति पकड़ कर प्राप्त कर सकता है.
मौके पर सहायक वन अरण्यपाल डॉ. जगदीश गौत्तम, वन परिक्षेत्र अधिकारी राजेश ठाकुर मौजूद रहे.