विशेष खबर : कौन हैं आदिवासी…

सादा जीवन उच्च विचार का उदाहरण देना हो तो आदिवसी समाज... Panchayat Times

नई दिल्ली. चाहे हम स्वच्छता की बात करें, प्रकृति प्रेम की बात करें या फिर सादा जीवन उच्च विचार का उदाहरण देना हो तो आदिवसी समाज से बेहतर कोई और नहीं हो सकता. पूरी दुनिया में कमोबेश हर जगह आदिवासी लोग नजर आ जाएंगे. ये उन लोगों का समूह है जो आज तक अपने संस्कृति के सबसे ज्यादा करीब हैं, उन्हें संरक्षित किए हुए हैं. भारत में भी लगभग 8.6 प्रतिशत आबादी आदिवासी है. यानि लगभग 10 करोड़ की जनसंख्या के साथ ये लोग पूरे भारत में फैले हुए हैं.

आदिवासी शब्द आपने बहुत सुना होगा लेकिन क्या आपको वाकई इसका मतलब पता है? आदिवासी शब्द दो शब्दों ‘आदि’ और ‘वासी’ से मिल कर बना है और इसका अर्थ मूल निवासी होता है. पुरातन लेखों में आदिवासियों को अत्विका और वनवासी भी कहा गया है (संस्कृत ग्रंथों में). महात्मा गांधी ने आदिवासियों को गिरिजन यानि पहाड़ पर रहने वाले लोग कहा था. भारतीय संविधान में आदिवासियों के लिए ‘अनुसूचित जनजाति’ पद का उपयोग किया गया है. भारत के प्रमुख आदिवासी समुदायों में गोंड, मुंडा, खड़िया, हो, बोडो, भील, खासी, सहरिया, संथाल, मीणा, उरांव, परधान, बिरहोर, पारधी, आंध,टोकरे कोली, महादेव कोली,मल्हार कोली,(महाराष्ट्र) टाकणकार आदि हैं.

अर्जुन मुंडा

हर बार की तरह इसबार भी जनजातीय कार्य मंत्रालय का दायित्व आदिवासी समाज के व्यक्ति को ही दिया गया है. झारखंड के खूंटी लोकसभा क्षेत्र से बेहद कम मार्जिन से जीत पाने वाले सांसद अर्जुन मुंडा को इस मंत्रालय में केंद्रीय मंत्री बनाया गया है. साथ ही राज्य मंत्री रेणुका सिंह को बनाया गया है.

विशेष
प्रतीक चित्र

भारत में आदिवासियों को ‘जनजातीय लोग’ के रूप में जाना जाता है. आदिवासी मुख्य रूप से भारतीय राज्यों उड़ीसा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल में अल्पसंख्यक है जबकि भारतीय पूर्वोत्तर राज्यों में यह बहुसंख्यक हैं, जैसे मिजोरम. भारत सरकार ने इन्हें भारत के संविधान की पांचवी अनुसूची में “अनुसूचित जनजातियों” के रूप में मान्यता दी है. अक्सर इन्हें अनुसूचित जातियों के साथ एक ही श्रेणी “अनुसूचित जाति एवं जनजाति” में रखा जाता है.

आदिवासियों का अपना धर्म भी है. ये प्रकृति-पूजक हैं और वन, पर्वत, नदियों एवं सूर्य की आराधना करते हैं. आधुनिक काल में जबरन बाहरी संपर्क में आने के फलस्वरूप इन्होंने हिन्दू, ईसाई एवं इस्लाम धर्म को भी अपनाया है. अंग्रेजी राज के दौरान बड़ी संख्या में ये ईसाई बने तो आजादी के बाद इनके हिूंदकरण का प्रयास तेजी से हुआ है.

आदिवासी बुद्धिजीवी विचार मंच के एक दिवसीय सम्मेलन में पूर्व मुख्यमंत्री बाबुलाल

भारतीय समाज के सबसे वंचित वर्ग

जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन अक्टूबर 1999 में भारतीय समाज के सबसे वंचित वर्ग अनुसूचित जनजाति (अजजा) के एकीकृत सामाजिक-आर्थिक विकास के समन्वित और योजनाबद्ध उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए किया गया था. जनजातीय कार्य मंत्रालय, अनुसूचित जनजाति के विकास के लिए चलाई जा रही समग्र नीति, योजना औऱ समन्वयन के लिए नोडल मंत्रालय है. जनजातीय कार्य मंत्रालय की गतिविधियां भारत सरकार (बिजनेस आवंटन) नियमावली, 1961 के तहत आवंटित विषयों से संबंधित हैं, इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

जनजातीय कार्य मंत्रालय अनुसूचित जनजातियों के विकास कार्यक्रमों के लिए समग्र नीति, आयोजना और समन्वय के लिए नोडल मंत्रालय है. क्षेत्र के कार्यक्रमों और इन समुदायों की नीति, आयोजना, निगरानी, मूल्यांकन आदि के विकास की योजनाओं के विषय में, इनका समन्वय संबंधित केन्द्रीय मंत्रालयों/विभागों, राज्य सरकारों और संघ राज्य क्षेत्रों के प्रशासन का दायित्व होगा. प्रत्येक केन्द्रीय मंत्रालय/विभाग जो इस क्षेत्र से संबंध रखता है, नोडल मंत्रालय या विभाग होगा.