हिमाचल में शुरू हुई बंदरों की नसबंदी, अब बचेंगे खेत और बागान

हिमाचल में 1.40 लाख बंदरों की नसबंदी'

शिमला/ हमीरपुर. हिमाचल को बंदरों के आतंक से निजात दिलाने में हमीरपुर जिला प्रदेश का नंबर वन जिला बन गया है. इस जिले में 36 हजार 557 बंदरों की नसबंदी की गई. बंदरों की जनसंख्या को कम करने के लिए शुरू किए गए नसबंदी अभियान में हमीरपुर ने राजधानी शिमला को भी पीछे छोड़ दिया है. शिमला बंदर नसबंदी में दूसरे स्थान पर है, वहीं तीसरे स्थान पर ऊना है.

बंदरों के कहर से निजात दिलाने के लिए शुरू की गई मुहिम के तहत हमीरपुर में सबसे अधिक बंदर पकड़े गए हैं और आपरेशन किए गए. प्रजनन की गति नियंत्रित करने के लिए सरकार ने बंदर नसबंदी का अहम निर्णय लिया था. इसके बाद हिमाचल प्रदेश के हर जिला में बंदर पकड़ने का अभियान शुरू किया गया. अब तक वाइल्ड लाइफ विभाग ने एक लाख 40 हजार 646 बंदर पकड़े हैं. इन्हें नसबंदी के बाद पकड़़े गए स्थानों पर छोड़ा गया है.

विभाग की मानें तो बंदरों की नसबंदी में हमीरपुर सबसे अग्रणी है. हमीरपुर में 36 हजार 557 बंदरों की नसबंदी की गई. शिमला में 27 हजार 885 बंद पकड़े गए हैं. इसके बाद कांगड़ा में 27 हजार 128 बंदरों के आपरेशन किए गए. ऊना के दो केंद्रों में 27 हजार 285 बंदरों की नसबंदी की गई. मंडी में नौ हजार 83 बंदर पकड़े गए. पांवटा साहिब में आठ हजार 598 और चंबा में छह हजार 569 बंदरों की नसबंदी की गई है. इन जिला में ही बंदर नसंबदी केंद्र स्थापित हैं.

यहां सबसे बड़ा मुद्दा बंदर हैं

हिमाचल प्रदेश में बंदरों का बड़ा आतंक है. खासकर किसानों पर इसकी सबसे अधिक मार पड़ रही है. बंदरों से हो रहे नुकसान के कारण किसानों और बागबानों ने अपने पारंपरिक कामकाज को छोड़ दिया है. लगातार बढ़ रही बंदरों की संख्या के बाद प्रदेश सरकार ने इनकी नसबंदी का फैसला लिया था. इसके बाद प्रदेश में आठ नसंबदी केंद्र खोले गए. इनमें बंदर नसंबदी के लिए विशेषज्ञ तैनात किए गए.

बंदरों के हमले में हर दिन 20 लोग घायल होते हैं :

हिमाचल में बंदरों के आतंक की स्थिति यह है कि यहां पर हर दिन कम से कम जहां 20 से ज्यादा लोग बंदरों के हमले में घायल होते हैं वहीं हर साल लगभग 70 फीसदी ग्रामीण इलाकों में बंदर करोड़ों रुपए की फसल को नुकसान पहुंचाते हैं. एक सर्वे के अनुसार हिमाचल में 4 लाख से भी ज्यादा बंदर हैं. स्थिति यह है कि पिछले तीन वर्षों में बंदरों ने राज्य में 674 से अधिक लोगों को काटा जिन्हें वन विभाग को क्षतिपूर्ति के रूप में लगभग 28 लाख रुपए देने पड़े.

करोड़ों खर्च लेकिन नतीजा सिफर :

हिमाचल प्रदेश वन विभाग के अनुसार विभाग की ओर से बंदरों की समस्या के निदान के लिए शिमला, हमीरपुर, गोपालपुर तथा ऊना में बंदरों की नसबन्दी का काम चल रहा है. 2007 से लेकर अब तक 94,334 बंदरों की नसबंदी की जा चुकी है. किसानों के खेतों से बंदरों को दूर रखने हेतु एयर गन के ट्रायल किए जा रहे हैं.

वन्यजीव विभाग नसबंदी के लिए बंदरों को पकड़ने पर प्रति बंदर 500 रुपये का भुगतान कर रहा है बंदरों के आतंक से छुटकारा दिलाने के लिए ही आवारा बंदरों को पकड़ने की योजना बनाई गई है. यह योजना अक्टूबर 2011 में शुरू की गई थी. बंदरों को पकड़ने के लिए अब तक 336 लोगों को 3.22 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है.