कहानी लिली पूर्ति की जिसने सरकारी योजना के माध्यम से बदली 31 महिला किसानों की जिंदगी

कहानी 38 वर्षीय लिली पूर्ति की जिसने सरकारी योजना के माध्यम से बदली 31 महिला किसानों की जिंदगी - Panchayat Times

खूंटी/रांची. कहानी 38 वर्षीय लिली पूर्ति की है, जोकि खूंटी जिले के मुरहू प्रखंड के हस्सा पंचायत के छोटे से गांव हेसेल की रहने वाली हैं. जिला मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित हेसेल गांव कई अन्य गांवों की तरह एक कृषि प्रधान गांव है. इस गांव के ज्यादातर लोग अपनी रोजी-रोटी के लिए खरीफ फसल पर आश्रित थे.

इस गांव के किसान साल भर में बमुश्किल एक या दो फसल की उपज ही ले पाते थे. इस गांव की सिंचित भूमि 5 प्रतिशत से भी कम थी. सभी सिंचित भूमि उस गांव से प्रवाहित हो रहे पेलोल डैम के छोटे से नहर के आस-पास ही मौजूद थी.

मौसमी बेरोजगारी, पलायन जैसी समस्याएं थी हावी

हेसेल में मौसमी बेरोजगारी, पलायन जैसी समस्याएं साल दर साल जटिल होती जा रही थी. अतः इस गंभीर स्थिति में लिली ने सरकारी योजना के माध्यम से जुड़कर न केवल खुद को अपितु गांव के कुल 31 महिला किसानों को लाभ दिलवाया.

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वर्ष 2018 में लिली को ग्रामीण विकास विभाग, जेएसएलपीएस, के अंतर्गत दीन दयाल उपाध्याय राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूह (Self Help Groups) से जुड़ने का मौका प्राप्त हुआ. इसके बाद लिली ने “जोहार” परियोजना के तहत अपने गांव की 30 अन्य महिलाओं के साथ मिल कर सिंगी महिला उत्पादक समूह का बनाया.

जुलाई 2018 में गठित इस उत्पादक समूह का मुख्य उद्देश्य उच्च मूल्य कृषि (High Value Agriculture) को बढ़ावा देने का था. उसी महीने लिली का चयन आजीविका कृषक मित्र (ए.के.एम) उत्पादक समूह के माध्यम से किया गया. उस पद पर रहते हुए लिली पूर्ति ने विभिन्न पौधों को उपजाने की विधि (पी.ओ.पी), सीधी रेखा में खेती करना (Line Showing) व खेती से जुड़ी अन्य जानकारी का आवासीय प्रशिक्षण भी मिला.

इन प्रशिक्षणों के परिणामस्वरूप लिली ने हेसेल में मौजूद अन्य महिला किसानों को नई विधि व तकनीक से खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया. इसी क्रम में जोहार परियोजना के अंतर्गत अनुदान पर सोलर लिफ्ट सिंचाई की इकाई सिंगी महिला उत्पादक समूह को आवंटित हुई.

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जिसके माध्यम से हेसेल गांव की 21 एकड़ चिन्हित जमीन बिना किसी व्यय के सिंचित की जा सकती थी. इसकी स्थापना से हेसेल ग्रामवासियों में खुशी की लहर दौड़ उठी किन्तु पेलोल डैम की एक छोटी सी नहर होने की वजह से उसमे पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा था.

लिली ने अपने पति नीरज मुंडू व उत्पादक समूह की महिलाओं के साथ मिलकर ग्राम सभा में इस समस्या के हल के लिए चेक-डैम बनाने का प्रस्ताव रखा. चेक-डैम का निर्माण कराने के प्रस्ताव का समर्थन सभी ग्रामीणों के तरफ से मिला व साल भर के अन्दर इसका निर्माण सुनिश्चित हुआ.

पानी की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए चेक-डैम के आगे एक बोरी-बांध का निर्माण

पानी की मौजूदगी को सुनिश्चित करने के लिए लिली व अन्य ग्रामीणों ने मिल कर चेक-डैम के आगे एक बोरी-बांध का निर्माण किया जिससे उपलब्ध पानी में व्यापक वृद्धि देखने को मिली. इस बढे़ हुए जल-स्तर को पास में लगे कुएं से पाइप के माध्यम से जोर दिया गया. जिससे सिंचाई के बाद भी कुऐं का जल-स्तर कम नहीं होता है.

साल भर में लगभग 70,000 रुपए की आमदनी

कल तक जिस जमीन पर केवल खरीफ की फसल उपजाते थे आज वहां तीनों मौसम की मौसमी फसल की खेती कर किसान व उनका परिवार अपने उत्पादों को बेच कर साल भर में लगभग 70,000 रुपए की आमदनी कर पा रहे है. लिफ्ट सिंचाई के फायदों को देखते हुए आस-पास के अन्य किसान भी ऐसी इकाई लगाने के लिए इक्षुक और प्रेरित हो रहे हैं.