किसानों की मांग के आगे झुकी सरकार, किसानों द्वारा पराली को जलाना अपराध की श्रेणी से बाहर, अभी 2,500 से लेकर 15 हजार तक के जुर्माने का प्रावधान

किसानों की मांग के आगे झुकी सरकार, किसानों द्वारा पराली को जलाना अपराध की श्रेणी से बाहर, अभी 2,500 से लेकर 15 हजार तक के जुर्माने का प्रावधान - Panchayat Times
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नई दिल्ली. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने किसानों की एक और मांग को मान लिया है. केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने तीनों कृषि कानूनों की वापसी का बिल सोमवार 29 नवंबर को संसद में पेश करने से पहले आज शनिवार, 27 नवंबर को कहा कि सरकार ने किसानों द्वारा पराली जलाने को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है. उन्होंने किसानों की इस मांग को केंद्र सरकार द्वारा मान लेने का ऐलान किया है.

किसानों की लगभग सभी मांगे पूरी : मंत्री

मंत्री ने कहा कि किसानों की लगभग सभी मांगे पूरी हो चुकी हैं. ऐसे में उन्हें अब अपने-अपने घरों को वापस लौट जाना चाहिए. नरेंद्र तोमर ने कहा कि जब तीनों कृषि कानून वापसी का ऐलान प्रधानमंत्री कर चुके है और संसद में बिल आ रहा तो ऐसे में किसानें के आंदोलन का अब कोई औचित्य नहीं रह गया है. तोमर ने कहा कि किसान अब बड़े मन का परिचय दें और अपने घर लौट जायें.

किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने पर कहा कि यह राज्यों का विषय

मंत्री ने किसान आंदोलन के दौरान किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने पर कहा कि यह राज्यों का विषय है, इसलिए इन मामलों पर संबंधित राज्य सरकारें फैसला करेंगी. उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price) देने के लिए प्रधानमंत्री ने कमेटी की गठन की घोषणा की है, उनकी रिपोर्ट आते ही उस पर भी कार्रवाई की जाएगी.

कितना है जुर्माना

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green Tribunal) ने दिसंबर 2015 में फसल अवशेषों को जलाने पर रोक लगाते हुए इसका उल्लंघन करने वाले किसानों पर दंड लगाने का प्रावधान किया था. अधिकरण के आदेशानुसार पराली जलाते पकड़े जाने पर 2 एकड़ भूमि तक वाले किसानो पर 2 हजार 500 रुपये, दो से पांच एकड़ भूमि वाले किसानो पर 5 हजार रुपये और पांच एकड़ से ज्यादा की भूमि पर 15 हजार रुपये का तक का जुर्माना लगाया जा सकता था.