वीरभद्र नहीं चाहते कि कांग्रेस अपने पैरों पे खड़ी हो : सुखविंद्र सिंह सुक्खू

वीरभद्र सिंह और प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू के बीच सियासी
प्रतीक चित्र

शिमला. हिमाचल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाए जाने के दो दिन बाद सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पर हमला बोला है. सुक्खू ने रविवार को कहा कि पार्टी में अच्छा काम करने वाले हर नेता का विरोध करना वीरभद्र का स्वभाव बन गया है. पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि संगठन का मजबूत होना वीरभद्र की सबसे बड़ी समस्या है. वे कभी चाहते ही नहीं थे कि कांग्रेस अपने पैरों पर खड़ी हो. इसलिए हमेशा उन्होंने कांग्रेस को अपने से ऊपर प्रदेश में उठने ही नहीं दिया.

पहले उन्होंने वरिष्ठ कांग्रेस नेता सत महाजन, फिर विद्या स्टोक्स और विप्लव ठाकुर व उसके बाद कौल सिंह ठाकुर का विरोध किया. वीरभद्र हिमाचल में खुद को ही कांग्रेस मानते हैं, जबकि समय बदल चुका है. कांग्रेस प्रदेश में बूथ स्तर तक मजबूत है. जीत के लिए वीरभद्र का ही होना जरूरी नहीं. वीरभद्र कांग्रेस नहीं, कांग्रेस पार्टी का हिस्सा हैं.

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सुक्खू ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए छह साल दो महीने के कार्यकाल में जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत किया है, किसी व्यक्ति विशेष को नहीं. प्रदेश में पहले ड्राइंग रूम से प्रदेश, जिला व ब्लॉक कांग्रेस कमेटियां बनती थीं, कहीं-कहीं ब्लॉक कमेटियां होती थीं, उन्होंने इस परंपरा को बदलते हुए सब कुछ पारदर्शी बनाया. कांग्रेस मुख्यालय से पार्टी हाईकमान की स्वीकृति के बाद सभी कमेटियां बनीं. पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि वीरभद्र सिंह की आदत रही है कि जब भी चुनाव आते हैं तो पार्टी नेतृत्व के साथ ब्लैकमेलिंग शुरू कर देते हैं. पार्टी हाईकमान पर पूर्व मुख्यमंत्री की टिप्पणी अशोभनीय है. लोकसभा चुनाव में टिकट आवंटन को लेकर वीरभद्र ने हाईकमान के लिए अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल किया है. उन्हें इसके लिए माफी मांगनी चाहिए.

बकौल सुक्खू, उन्होंने जिला और ब्लॉक कांग्रेस कमेटियां बनाईं, बूथ स्तर पर संगठन को पहुंचाया, नए और युवा चेहरों को प्रदेश कमेटी में जगह दी. उन्होंने कांग्रेस के कुनबे को बढ़ाया, न कि व्यक्ति विशेष के, इसलिए वीरभद्र उनके भी धुर विरोधी बन गए.