नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश की सांसद सुमित्रा बाल्मिक ने शुक्रवार को राज्यसभा में 60 वर्ष से अधिक आयु के माता-पिता की देखभाल के लिए सरकारी और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को 45 दिन की अनिवार्य छुट्टी देने की मांग उठाई। शून्यकाल में मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं और युवाओं के उत्थान के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठा रही है, लेकिन अब बुजुर्गों की देखभाल के लिए भी नीति बनाने का समय आ गया है।
सांसद ने “सैंडविच जेनरेशन” का जिक्र करते हुए कहा कि आज कई लोग नौकरी की जिम्मेदारियों और बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल के बीच संतुलन बनाने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 2026 में देश में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या 14.9 करोड़ से अधिक हो चुकी है, जो 2036 तक 23 करोड़ से ज्यादा हो सकती है। उनके अनुसार, जल्द ही हर तीसरा भारतीय बुजुर्ग होगा।
नौकरी में छुट्टी मिलना मुश्किल हो जाता
सुमित्रा बाल्मिक ने कहा कि तेजी से हो रहे शहरीकरण और रोजगार के कारण करोड़ों युवा अपने घरों से दूर रह रहे हैं, जिससे बुजुर्ग माता-पिता अकेले रह जाते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब घर में बुजुर्गों को चिकित्सा देखभाल की जरूरत होती है, तब बेटा या बेटी का साथ होना बहुत जरूरी होता है, लेकिन नौकरी में छुट्टी मिलना मुश्किल हो जाता है।
उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में कर्मचारियों को 60 वर्ष से अधिक आयु के माता-पिता की देखभाल के लिए 45 दिन की छुट्टी देने का प्रावधान किया जाए। उन्होंने कहा, “जैसे एक मां अपने बच्चे को 20 साल देती है, वैसे ही बेटे-बेटी को भी बीमार माता-पिता की देखभाल के लिए समय मिलना चाहिए।”
