नई दिल्ली: Supreme Court of India ने सोमवार को मतदान केंद्रों पर फिंगर और आईरिस बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली लागू करने की मांग वाली याचिका पर Election Commission of India (ECI), केंद्र सरकार और राज्यों को नोटिस जारी किया है। यह याचिका भाजपा नेता और वकील Ashwini Kumar Upadhyay ने दायर की है।
दो जजों की बेंच ने की सुनवाई
इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश Justice Surya Kant और न्यायमूर्ति Justice Joymalya Bagchi की पीठ ने की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस याचिका पर मौजूदा विधानसभा चुनावों के दौरान कोई फैसला लागू नहीं किया जा सकता।
अगली चुनाव प्रक्रिया के लिए हो सकता है विचार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह जांच करना जरूरी है कि क्या भविष्य में होने वाले लोकसभा या विधानसभा चुनावों में इस तरह की बायोमेट्रिक प्रणाली को लागू किया जा सकता है। कोर्ट ने सभी पक्षों से इस पर जवाब मांगा है।
पहले चुनाव आयोग जाने की दी थी सलाह
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शुरुआत में याचिकाकर्ता को चुनाव आयोग के पास जाने की सलाह दी थी। हालांकि, जब याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया कि वह मौजूदा चुनावों को प्रभावित नहीं करना चाहते, तब कोर्ट ने मामले पर सुनवाई के लिए सहमति दी।
इन राज्यों में चल रहे हैं चुनाव
फिलहाल Assam, Kerala और Puducherry में 9 अप्रैल को एक चरण में मतदान हो चुका है। वहीं Tamil Nadu में 23 अप्रैल को वोटिंग होगी, जबकि West Bengal में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान कराया जाएगा। इन सभी राज्यों के चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे।
याचिका में क्या कहा गया
याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने अपनी याचिका में कहा कि चुनाव प्रक्रिया की शुचिता और पारदर्शिता अभी भी रिश्वत, दबाव, फर्जी मतदान, डुप्लिकेट वोटिंग और घोस्ट वोटिंग जैसी समस्याओं से प्रभावित होती है।
उन्होंने तर्क दिया कि बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली लागू होने से इन समस्याओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है और चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जा सकता है।
क्यों अहम है मामला?
यह मामला देश की चुनावी प्रक्रिया में बड़े सुधार से जुड़ा है। अगर सुप्रीम कोर्ट भविष्य के चुनावों के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम लागू करने पर सहमति देता है, तो इससे फर्जी मतदान पर लगाम लग सकती है और लोकतंत्र की विश्वसनीयता मजबूत हो सकती है।
