नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अवैध तरीके से भारत में प्रवेश करने वाले लोगों को किसी भी तरह का कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं है। अदालत ने कहा कि देश में घुसपैठ करके आने वालों के लिए “रेड कार्पेट” नहीं बिछाया जा सकता।
रोहिंग्या मामले पर सुनवाई के दौरान टिप्पणी
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने यह टिप्पणी एक हैबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई के दौरान की। याचिका में कुछ रोहिंग्याओं के कथित रूप से सरकारी हिरासत से गायब होने का मामला उठाया गया था।
नागरिकों को मिले प्राथमिकता: सुप्रीम कोर्ट
बेंच ने स्पष्ट कहा कि सरकार की सेवाएं, सुविधाएं और संसाधन पहले देश के नागरिकों के लिए होने चाहिए। अदालत ने टिप्पणी की कि:किसी ऐसे व्यक्ति को लाभ नहीं दिया जा सकता जिसने अवैध रूप से देश में प्रवेश किया हो।”
हिरासत में यातना नहीं दी जा सकती
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अवैध प्रवासियों को कानूनी अधिकार नहीं मिलते, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उनके साथ किसी प्रकार की शारीरिक यातना या अमानवीय व्यवहार किया जाए।कोर्ट ने कहा कि अवैध प्रवासी को अधिकार नहीं मिलते, लेकिन उन्हें हिरासत में यातना देना भी स्वीकार्य नहीं है।
सरकार की नीति पर फिर उठे सवाल
इस फैसले के बाद भारत में अवैध घुसपैठ—विशेषकर रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों—को लेकर बहस एक बार फिर तेज होने की संभावना है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने साफ शब्दों में यह संदेश दिया है कि भारत में घुसपैठ कर आने वालों को कानूनी अधिकार नहीं, लेकिन उन्हें अमानवीय व्यवहार का भी सामना नहीं करना चाहिए और सरकार को संसाधन पहले अपने नागरिकों पर खर्च करने चाहिए।
