नई दिल्ली: Supreme Court of India ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) जैसे लाभों में राज्य सरकारें सेवारत कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच भेदभाव नहीं कर सकतीं। अदालत ने स्पष्ट किया कि महंगाई दोनों पर “समान रूप से असर” डालती है, इसलिए अलग-अलग दरें तय करना अनुचित और मनमाना है।
जस्टिस Manoj Misra और जस्टिस Prasanna B Varale की पीठ ने Government of Kerala और Kerala State Road Transport Corporation (KSRTC) की अपीलों को खारिज करते हुए पेंशनर्स के पक्ष में फैसला बरकरार रखा।
अदालत ने Article 14 of the Indian Constitution का हवाला देते हुए कहा कि समानता का सिद्धांत मनमाने फैसलों के खिलाफ है। कोर्ट के मुताबिक, वर्गीकरण तभी वैध है जब वह स्पष्ट अंतर (intelligible differentia) पर आधारित हो और उसका उद्देश्य से तार्किक संबंध (rational nexus) हो।
पीठ ने कहा कि इस मामले में विवाद लाभ के अधिकार को लेकर नहीं, बल्कि उनकी अलग-अलग दरों को लेकर है। जब DA और DR दोनों का उद्देश्य महंगाई से राहत देना है और महंगाई से कर्मचारी व पेंशनर दोनों समान रूप से प्रभावित होते हैं, तो अलग-अलग वृद्धि दर तय करना भेदभावपूर्ण है।
हालांकि कोर्ट ने यह भी माना कि वित्तीय संकट के कारण सरकार लाभों के क्रियान्वयन में देरी कर सकती है या अलग तारीखें तय कर सकती है, लेकिन एक बार बढ़ोतरी का फैसला लेने के बाद अलग-अलग दरें तय करना Article 14 of the Indian Constitution का उल्लंघन होगा।
क्या था मामला?
यह मामला 2021 के एक सरकारी आदेश से जुड़ा है, जिसमें केरल सरकार ने KSRTC कर्मचारियों के लिए DA में 14% की बढ़ोतरी की थी, जबकि पेंशनर्स के लिए DR सिर्फ 11% बढ़ाया गया। इस अंतर को पेंशनर्स ने चुनौती दी थी।
पहले हाईकोर्ट की एकल पीठ ने याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन बाद में डिवीजन बेंच ने पेंशनर्स के पक्ष में फैसला दिया, जिसे राज्य सरकार और KSRTC ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
