नकदी की तंगी से जूझ रही बिजली वितरण कंपनियों के लिए कोरोना वायरस एक बड़ी चुनौती

नकदी की तंगी से झूझ रही बिजली वितरण कंपनियों के लिए कोरोना वायरस एक बढ़ी चुनौती - Panchayat Times

नई दिल्ली. पहले ही नकदी की तंगी से जूझ रही बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के लिए कोरोना वायरस के चलते हुए लॉकडाउन के दौरान हुई बिजली की मांग में गिरावट ने ओर समस्याएं पैदा कर दी हैं. ऐसी खबरें हैं कि बिजली वितरण कंपनियां के बिल संग्रह कम होने वाले हैं, जो नकदी प्रवाह पर खासा प्रभाव डालने वाले हैं.

लगभग 30,000 करोड़ रूपये राजस्व नुकसान की संभावना : CII

उद्योग मंडल CII (Confederation of Indian Industries) ने अनुमान लगाया है कि मांग कम होने के चलते डिस्कॉम को लगभग 30,000 करोड़ रूपये का शुद्ध राजस्व नुकसान होने की संभावना है. और लॉकडाउन के चलते 50,000 करोड़ रुपये की तरलता (Liquidity) की कमी देखी जा सकती है. सरकार ने डिस्कॉम को तीन महीने की मोहलत देते हुए कुछ उपाय भी किए हैं जैसे डिस्कॉम और ट्रांसमिशन कंपनियों को भुगतान करने और देर से भुगतान पर कोई जुर्माना नहीं लगाया जाएगा.

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रियायती ऋण का प्रस्ताव

पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन और ग्रामीण विद्युतीकरण निगम से रियायती ऋण का प्रस्ताव भी डिस्कॉम के पास है, पैसे कि समस्या के समाधान के लिए कैबिनेट की मंजूरी का भी इंतजार है. कई राज्यों कि डिस्कॉम ने उच्च लागत वाली बिजली खरीदना बंद कर दिया है और स्थिति से निपटने के लिए कम लागत वाली बिजली खरीद पर जोर दे रहे हैं.

महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने उच्च लागत वाले थर्मल पावर प्लांट से बिजली खरीदना बंद कर दिया है. और थोक ऊर्जा बाजार से बिजली खरीद रहे है जो पूरे भारत में कम मांग के कारण इन दिनों काफी सस्ती है.

वैकल्पिक निवेश कोष के रूप में विचार कर रही है सरकार

सरकार विनियमित बिजली उत्पादन कंपनियों की निश्चित लागत को कम करने या खत्म करने की संभावना तलाश रही है जो मूल रूप से निवेश पर एक वापसी है जब वितरण कंपनियां सामान्य परिस्थितियों में बिजली नहीं खरीदती हैं.

हालांकि, पावर कंपनियां इसका यह कहते हुए विरोध कर रही हैं कि ऐसा कोई नियम नहीं हैं जो निश्चित लागतों (बिजली बनाने में लगने वाली मूल लागत जैसे कोयला ओर अन्य प्रशासनिक खर्च) में कमी को दिखाता हो.

फरवरी 2020 तक 92,000 करोड़ का बकाया

यह देखते हुए कि सरकार बिजली उत्पादन कंपनियों के डिस्कॉम पर फरवरी 2020 तक लंबित 92,000 करोड़ के बकाए का भुगतान करने के लिए एक वैकल्पिक निवेश कोष के रूप में विचार कर रही है. जो कम बिजली की मांग के मद्देनजर महत्व रखता है. और इससे डिस्कॉम को अपना लोड बढ़ाने और 24X7 निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी.