मिटने की कगार पर है शिमला में टैगोर का घर

शिमला में खंडहर हो रही टैगोर की यादें

शिमला/नई दिल्ली. महान साहित्यकार एवं भारत के प्रथम नोबेल विजेता रबींद्रनाथ टैगोर का हिमाचल की राजधानी शिमला से गहरा नाता रहा है. यहां के बालूगंज और चौड़ा मैदान के बीच स्थित वुडफील्ड हाउस उनका ठिकाना रहा है. यहीं पर उन्होंने लगभग आठ कविताएं लिखी और अपने प्रसिद्ध गीतांजलि उपन्यास के कुछ अंश भी. शुक्रवार को टैगोर पर शोध करने शिमला पहुंचे पश्चिम बंगाल के विश्व भारती विश्वविद्यालय के छात्र जब इस ऐतिहासिक इमारत को देखने गए तो उसकी हालत देखकर वह बहुत निराश हुए. वर्तमान में यह भवन जर्जर हो चुका है.

1893 के अक्तूबर और नवंबर में इस भवन को रबींद्रनाथ टैगोर ने अपना निवास स्थान बनाया था. राज्य सरकार इस ऐतिहासिक भवन का संरक्षण करने में नाकाम रही है. यह भवन आज भी निजी संपत्ति है. वुडफील्ड हाउस को आज के समय में योगदा आश्रम के नाम से जाना जाता है.

वुडफील्ड हाउस का जायजा लेता विश्व भारती विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का दल

1893-94 में रबींद्र नाथ टैगोर के बड़े भाई भारतीय नागरिक सेवा के प्रथम भारतीय तथा संगीतकार सत्येंद्रनाथ टैगोर ने इस भवन को करीब आठ महीने के लिए किराये पर लिया था. बंगाल महिला आंदोलन की प्रमुख उनकी पत्नी नंदिनी देवी और उनकी बेटी इंदिरा भी उनके साथ इस भवन में रही थी. रबींद्रनाथ टैगोर उनके साथ यहां रहे थे.

बोर्ड बता रहा पूरा इतिहास

वुडफील्ड हाउस के ऊपर एक बोर्ड लगा है. इसे हिमाचल के तत्कालीन मुख्य सचिव एमएस मुखर्जी ने 23 अप्रैल 1993 को लगाया था. हिंदी और अंग्रेजी दोनों में ही सफेद पत्थर पर यह लिखा है कि टैगोर यहां कब आए. उन्होंने यहां क्या किया और कौन-कौन उनके साथ था.

भवन के संरक्षण के लिए प्रधानमंत्री से की जाएगी अपील

विश्व भारती विश्वविद्यालय शोधकर्ताओं ने कहा कि रबींद्रनाथ टैगोर ने अपनी अनमोल यादों को हिमाचल को सौंपा है, लेकिन हिमाचल प्रदेश सरकारें इस ऐतिहासिक भवन का संरक्षण करने में नाकाम रही हैं. भवन को देखकर उन्हें काफी निराशा हुई. भवन की स्थिति को देखकर यह छात्र मुख्यमंत्री के पास शिकायत लेकर पहुंचे. छात्रों ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सामने भी इस भवन के संरक्षण का मुद्दा उठाएंगे.