देश के पर्यटन मानचित्र पर आएगा टांगीनाथ धाम और आंजन धाम

नई दिल्ली. झारखंड के गुमला जिले में स्थित टांगीनाथ धाम और आंजन धाम को देश के पर्यटन क्षेत्र से जोड़कर इन तीर्थस्थलों को विकसित किया जाएगा. इसको लेकर जनजातीय कार्य राज्‍यमंत्री सुदर्शन भगत ने पर्यटन राज्‍यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) के. जे. अल्‍फोंस से मुलाकात की है. जिसका उद्देश्‍य टांगीनाथ धाम और आंजन धाम को पर्यटन की दृष्टि से स्वदेश दर्शन योजना के तहत जोड़कर इन स्थानों को पर्यटन के लिए विकसित करना था.

भगवान शिव के लाखों उपासक हर साल टांगीनाथ धाम आते हैं. आंजन धाम भगवान हनुमान के उपासकों के लिए किसी तीर्थस्‍थल से कम नहीं है. सुदर्शन भगत जी ने इस बात पर बल दिया की इन धार्मिक स्‍थलों को पूर्णरूप से सुविधायुक्‍त और पर्यटन हेतु विकसित किया जाना आवश्‍यक है ताकि इस क्षेत्र के जनजातीय समाज का विकास भी पर्यटन के माध्‍यम से हो सके. पर्यटन राज्‍यमंत्री ने इस मुलाकात में में आश्वासान दिया कि झारखंड के इन धार्मिक स्‍थलों को केन्‍द्र सरकार पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी.

आंजन धाम जहां हनुमान जी का जन्म हुआ था :

भगवान हनुमान के जन्म का इतिहास झारखंड के गुमला जिले के उत्तरी क्षेत्र में अवस्थित आंजन ग्राम से जुड़ा हुआ है. मान्यता है क‍ि यही माता अंजनी ने भगवान हनुमान को जन्म दिया था. माता अंजनी के नाम से ही इस गांव का नाम आंजन पड़ा. यह गांव जिला मुख्यालय से लगभग 22 किमी की दूरी पर स्थित है. साथ ही देश के अंदर यह ऐसा पहला मंदिर है, जहां स्थापित मूर्ति में बाल हनुमान माता अंजनी की गोद में बैठे हुए हैं.

यहां के लोग मानते हैं कि हनुमान का जन्म गुमला जिले के आंजनधाम में स्थित पहाड़ी की गुफा में हुआ था. जिस गुफा में हनुमान जी का जन्म हुआ था, उसका दरवाजा कलयुग में अपने आप बंद हो गया. कहते हैं दरवाजे को हनुमान की माता अंजनी ने स्वयं बंद कर लिया क्योंकि स्थानीय लोगों द्वारा वहां दी गई बलि से वे नाराज थीं. आज भी यह गुफा आंजन धाम में मौजूद है.

आंजनधाम में 1953 में श्रद्धालुओं ने मिलकर अंजनी मंदिर की स्थापना की थी. आंजनधाम से जुड़ी और भी पौराणिक गाथाएं जुड़ी हैं. कहते हैं, गुमला जिले के पालकोट प्रखंड में बालि व सुग्रीव का राज्य था. पंपापुर सरोवर भी यहीं है, जहां भगवान राम और भ्राता लक्ष्मण ने रुककर स्नान भी किया था.

भगवान शिव का निवास है टांगीनाथ धाम :

झारखंड के गुमला जिले के डुमरी प्रखंड में स्थित है टांगीनाथ धाम है. टांगीनाथ धाम में कई पुरातात्विक व ऐतिहासिक धरोहर हैं, जो आज भी साक्षात है. यहां की कलाकृतियां व नक्काशी प्राचीनकाल की कहानी बयां करती है. यहां 7वीं व 9वीं शताब्दी के कई साक्ष्य मौजूद हैं. ऐसी मान्यता है कि टांगीनाथ धाम में भगवान शिव का निवास है. टांगीनाथ धाम में यत्र-तत्र सैंकड़ों की संख्या में शिवलिंग हैं. बताया जाता है कि यह मंदिर शाश्वत है. स्वयं विश्वकर्मा भगवान ने टांगीनाथ धाम की रचना की थी.

यहां भगवान शिव का त्रिशूल है, जो जमीन पर गड़ा हुआ है. इसका अग्र भाग जमीन के ऊपर है. जिसपर कभी जंग नहीं लगता है. टांगीनाथ धाम के रहस्यों पर से पर्दा उठाने के उद्देश्य से 1989 ईस्वी में इस क्षेत्र की खुदाई हुई थी. एक सप्ताह तक खुदाई हुई थी. खुदाई में धरती के सीने से कई बहुमूल्य आभूषण प्राप्त हुए. सावन माह में झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार व उड़ीसा राज्य के भक्त बाबा टांगीनाथ के दर्शन को आते हैं.