चाय की प्याली में अब खुशबू फैलाएगी छोटा शिमला की चाय

चाय की प्याली में अब खूशबू फैलाएगी छोटा शिमला की चाय

नई दिल्ली. छत्तीसगढ़ का छोटा शिमला कहे जाने वाले जशपुर में अब असम की तर्ज पर चाय बागान तैयार हो गए हैं, जहां से पैदा होने वाली चाय की ब्रॉडिंग साराडीह चाय के नाम से की जा रही है. यहां के किसान अब परंपरागत खेती छोड़कर चाय की खेती कर रहे हैं. दो दिन पहले जब छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने प्रदेश व्यापी विकास यात्रा के दौरान जिला मुख्यालय जशपुर में आयोजित विकास प्रदर्शनी के स्टाल में जशपुर जिले के ग्राम साराडीह के किसानों से मुलाकात की. ये किसान अपनी जमीन पर चाय की खेती कर रहे हैं.

डॉ. सिंह को किसानों ने बताया कि गांव में पैदा की गई चाय की ब्रॉडिंग साराडीह चाय के नाम से की गई है. किसानों ने मुख्यमंत्री को साराडीह चाय का पैकेट भेंट किया. किसानों ने यह भी बताया कि इस चाय की दो किस्मों ग्रीन टी और सामान्य चाय की बिक्री की जा रही है.

उल्लेखनीय है कि जशपुर जिले के साराडीह गांव में स्थानीय किसानों की भागीदारी से वन विभाग द्वारा 20 एकड़ में चाय की खेती शुरू की गई है. यहां की जलवायु चाय और काफी के लिए बढ़िया साबित हो रही है. जशपुर में इसकी शुरुआत 2010 में हुई जब अघोर आश्रम सोगड़ा में इसे 5 एकड़ में लगाया गया था, जिसे देखते हुए अब वन विभाग ने भी चाय की खेती शुरू कर दी है.

चाय एक्सपर्ट आईडी सिंह ने बताया, ” जशपुर जिले का तापमान 40 डिग्री से कभी ऊपर नहीं जाता, जिसकी बजह से यहां का मौसम में नमी बानी रहती है और चाय की खेती के लिए सही मानी जाती है. आसाम से भी अच्छी ग्रोथ जशपुर के चाय बागानों के पौधो में दिखाई देती है.”

उन्होंने बताया कि समय के साथ अब जशपुर में जंगलों के अंधाधुंध कटाई के चलते जंगलों का दायरा सिमट कर रह गया है. जिसे देखते हुए अघोर आश्रम के बाबा ने यहां चाय की खेती शुरू की. हालांकि, चाय की खेती कैसे की जाए बारे में दिसंबर माह में चाय के पौधों की कटिंग की जाती है और एक साल बाद पौधे फिर तैयार हो जाते हैं. यही वजह है की बागान में सप्ताह में एक दिन मजदूरों द्वारा चाय की पट्टी तोड़ी जाती है और पेकिंग कर बाजार तक पहुंचाया जाता है.

दार्जिलिंग से लाए गए 12 हजार पौधे:

जशपुर में चाय की खेती दार्जिलिंग से लाए गए 12 हजार पौधों को रोपकर शुरू की गई. शुरूआत में एक एकड़ में लगाई गई पौध का अच्छा विकास हुआ. यहां चार क्विंटल चाय पत्तियां तोड़ी गईं. पत्तियों का लैब में परीक्षण किया गया. इससे पता चला कि जशपुर में पैदा हुई चाय की क्वालिटी देश की असम और नीलगिरि जैसी बेहतरीन चाय जैसा ही है.