तेजस्विनी योजना को 17 जिलों में पहुंचाएगी झारखंड सरकार

17 जिलों में तेजस्विनी योजना लागू करने जा रही है झारखंड सरकार

रांची. झारखंड सरकार किशोरियों और युवतियों के सामाजिक तथा आर्थिक सशक्तिकरण के लिए राज्य के 17 और जिलों में तेजस्विनी योजना लागू करने जा रही है. शुरुआत में इस परियोजना को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर दुमका और रामगढ़ जिले में शुरु किया गया था. राज्य की महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की मंत्री लुईस मरांडी ने कहा कि वहां इसके सफल क्रियान्वयन के बाद अब 17 जिलों में इसे लागू किया जा रहा है. इन जिलों में लगभग 12 हजार तेजस्विनी केंद्र का गठन किय़ा जा रहा है और लगभग 10 लाख किशोरियों और युवतियों को इस परियोजना का लाभ पहुंचाया जाएगा. फिलहाल 50 हजार किशोरियों को अनौपचारिक शिक्षा और 2 लाख युवतियों को कौशल विकास से जोड़ा जाएगा.

मरांडी बुधवार को होटल कैपिटल हिल में तेजस्विनी परियोजना को लेकर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रही थीं. उन्होंने कहा कि यह राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण एवं महत्वाकांक्षी योजना है. परियोजना के तहत 14 से 24 साल तक की किशोरियों को शिक्षित करने के साथ अब कौशल विकास का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा. इसका मकसद दूर-दराज के क्षेत्र में रहने वाली किशोरियों और युवतियों को समाज की मुख्यधारा में लाना और आर्थिक रुप से स्वावलंबन बनाना है. इस परियोजना के सफल क्रियान्वयन से समाज में आमूलचूल बदलाव भी देखने को मिलेगा. झारखंड को शिक्षित व स्वस्थ बनाने में भी यह कारगर साबित होगा.

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मरांडी ने कार्यशाला में मौजूद अधिकारियों से कहा कि किशोरियों और युवतियों को सामाजिक-आर्थिक रुप से सशक्त बनाने के लिए चलाई जा रही तेजस्विनी परियोजना को सिर्फ सरकारी काम नहीं समझें. समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझें. किशोरियों व युवतियों को स्वावलंबी बनाने में वे सरकारी कामकाज से आगे बढ़-चढ़कर कामकाज करें, ताकि तेजस्विनी परियोजना का मकसद शत-प्रतिशत पूरा हो.

तेजस्विनी परियोजना के अंतर्गत शिक्षा से वंचित 14 से 24 वर्ष तक की किशोरियों को अनौपचारिक शिक्षा के माध्यम से 8वीं तथा 10वीं तक की पढ़ाई कराई जाएगी. इसके साथ उन्हें कौशल विकास का प्रशिक्षण भी  दिया जाएगा. विश्व बैंक के सहयोग से शुरू की गई इस पांच वर्षीय परियोजना के लिए 540 करोड़ रुपए का बजट है. कार्यशाला में महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के सचिव अमिताभ कौशल, झारखंड कौशल विकास मिशन सोसाइटी के मिशन निदेशक रवि रंजन, झारखंड महिला विकास समिति के परियोजना निदेशक डॉ डीके सक्सेना, समाज कल्याण विभाग के निदेशक मनोज कुमार व अन्य अधिकारियों समेत सभी जिलों से आए समाज कल्याण पदाधिकारी मौजूद थे.