हिमाचल के डिजिटल बाबा कुम्भ में बने आकर्षण का केन्द्र

हिमाचल के डिजिटल बाबा कुम्भ में बने आकर्षण का केन्द्र

प्रयागराज/ कुम्भ नगरी. हाथ में एप्पल का फोन, पैरों में ब्रांडेड स्पोर्ट्स शूज और बैग में महंगा लैपटॉप, पर वेशभूषा साधुओं जैसी. यह कोई आम आदमी नहीं बल्कि एक सन्यासी है जो सोशल मीडिया के जरिए श्रद्धालुओं को ज्ञान देते हैं. पूरे देश में भारत डिजिटल बाबा के नाम से प्रसिद्ध यह स्वामी राम शंकर हैं. जो उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की कुम्भनगरी में आकर युवाओं को अध्यात्म से जोड़ने का काम कर रहे हैं.

फोटो साभार, स्वामी राम शंकर के फेसबुक पेज से

हिमाचल से आए डिजिटल बाबा ने बताया कि वो हर उस जगह जाते हैं, जहां युवा वर्ग के लोग होते हैं. वो युवाओं को धर्म और आध्यात्म की जानकारी भी देते हैं. उत्तर प्रदेश सरकार को भी धन्यवाद व्यक्त करते हुये लोगों से अपील की सभी भव्य कुम्भ को देखने के लिये यहां आएं.

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हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला के बैजनाथ में डिजिटल बाबा रहते हैं. डिजिटल बाबा स्वामी राम शंकर अपने वैचारिक अंदोलन को डिजिटल हथियार से आगे बढ़ा रहे हैं. उनके हाथ में हमेशा लैपटाप, मोबाइल रहता है और अपने भक्तों से फेसबुक, वाट्सएप के माध्यम से जुड़े रहते हैं. स्वामी राम शंकर के पास उनके एक विदेशी भक्त ने वर्ष 2013 में एप्पल का मैकबुक लैपटॉप दिया था. स्वामी बताते है कि जब कभी मैं सफर के दौरान लैपटॉप का प्रयोग करता हूं, तब लोग हमारी तस्वीरें खींचा करते हैं. स्वामी अपने काम का वीडियो एडिटिंग भी कर लेते हैं फोटोग्राफी में बेहद शौक रखते हैं, पल-पल की गतिविधि को इंटरनेट पर अपडेट भी करते रहते हैं.

फोटो साभार, स्वामी राम शंकर के फेसबुक पेज से

उन्होंने कहा कि खुद को समझकर अपनी आत्मा को जब युवा समझने लगेंगे तो वह ज्यादा से ज्यादा परेशानियों से दूर हो जाएंगे. आजकल के नौजवानों में उत्साह की कमी नहीं है, लेकिन उन्हें दिशा देने वाला कोई नहीं है. आज के दौर का युवा बहुत ही सजग हैं, इसलिए उन्हें पश्चिम की चकाचौंध से बचाना है. डिजिटल की दुनिया में खोए नौजवानों के भटकने की ज्यादा गुंजाइश होती है और उन्हें ऐसी गलतियों से बचाना आज का सबसे बड़ा धर्म है.

हिमाचल के लिए स्वामी राम शंकर के भीतर गज़ब की दीवानगी है. अक्सर अपने फेसबुक टाइम लाइन पर लव हिमाचल लिखते हैं वह कहते है की धरती का स्वर्ग हैं हिमाचल. पता नहीं क्या रिश्ता है न जाने किस जन्म का रिश्ता है. वह भगवान से प्रार्थना करते है की में अगर फिर से जन्म लू तो हिमाचल में ही जगह देना. मूलरूप से गोरखपुर के रहने वाले स्वामी राम शंकर ने गोरखपुर के महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज से 12वीं तक की शिक्षा प्राप्त की.

फोटो साभार, स्वामी राम शंकर के फेसबुक पेज से

गोरखपुर विश्वविद्यालय से बीकॉम की पढाई करने के दौरान संसार की लौकिक उपलब्धियों से हट कर आध्यात्मिक की तरफ आए. वर्ष 2008 नवम्बर में अयोध्या के लोमश आश्रम के महंत स्वामी शिवचरण दास महाराज से दीक्षा प्राप्त कर वैरागी बन गए. स्वामी रामशंकर ने युवाओं में भारतीय संस्कृति और संस्कार भरने के लिए सोशल मीडिया को अपनाया है. 30 वर्षीय स्वामी रामशंकर चार साल में देश के 13 राज्यों का दौरा कर चुके हैं. इस दौरान उन्होंने अपनी पहचान डिजिटल बाबा के रूप में बनाई है.

स्वामी राम शंकर ने बताया कि उन्होंने 11 साल पहले संयास लिया था. उन्होंने कहा कि आज गरीब व अमीर दुखी है. ऐसे में संन्यासी जीवन ही सुख प्राप्त करने का मार्ग है. डिजिटल बाबा लोगों विशेषकर युवाओं से इंटरनेट के माध्यम से ही संपर्क में आते हैं. जिन लोगों के विचार उनके साथ मिलते हैं, इसके बाद वे उनसे मुलाकात भी करते हैं. डिजिटल बाबा के अनुसार, अपने संस्कारों के बल पर ही भारत कभी विश्व गुरु रहा. इसके बल पर ही फिर से भारत को विश्व गुरु बनाया जा सकता है. स्वामी राम शंकर कहते है कि आज के युवापीढ़ी को अपने साथ जोड़ने का सबसे प्रभावी साधन सोशल मीडिया है इसी करना हम इस पलेटफार्म पर सक्रियता से उपलब्ध रहते हैं.