प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को स्वैच्छिक बनाने का लिया गया निर्णय, जानें क्या हैं इसके पीछे के कारण

नई दिल्ली. केन्द्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) को स्वैच्छिक बनाने का निर्णय लिया है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बीते बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया.

क्यों हो रहा था विरोध

दरअसल अब तक ये होता था कि जब भी कोई किसान अपने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) से फसली ऋण लेता था, तो उन किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अनिवार्य थी. इससे किसानों से बैंक ऋण की राशि में से पहले ही बीमा की राशि काट लेते थे, लेकिन फसल बीमा योजना को स्वैच्छिक बनाये जाने से बैंक अब ऐसा नहीं कर पायेंगे. जबकि अन्य किसानों के लिए यह योजना पहले ही स्वैच्छिक थी.

कितना है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का बीमा शुल्क

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को खरीफ की फसल के लिये 2 फीसदी प्रीमियम (बीमा शुल्क) और रबी की फसल के लिये 1.5 फीसदी प्रीमियम का भुगतान करना पड़ता है. इसके अलावा यह योजना वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के लिए भी बीमा सुरक्षा प्रदान करती है. बागवानी फसलों को लिए किसानों को पांच फीसदी प्रीमियम का भुगतान करना पड़ता है. फसल की बुआई के 10 दिनों के अंदर किसान को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का फॉर्म भरना जरूरी है.

क्या था असल मकसद

हर साल प्राकृतिक आपदा के चलते भारत में किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है. बाढ़, आंधी, ओले और तेज बारिश से उनकी फसल खराब हो जाती है. उन्हें ऐसे संकट से राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू की थी. इसे 13 जनवरी 2016 को शुरू किया गया था.

कौन कितना देता है हिस्सा

योजना के तहत अभी केंद्र और राज्य सरकारें प्रीमियम का 50-50% हिस्सा देते हैं. लेकिन अब पूर्वोत्तर के किसानों के लिए केंद्र सरकार प्रीमियम का 90% और राज्य 10% हिस्सा देंगे.

कितने किसान हुएं लाभान्वित

सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले साल इस योजना से 5.5 करोड़ किसान जुड़े. इससे लगभग 13 हजार करोड़ रुपए का प्रीमियम जमा हुआ. इसमें से 7 हजार करोड़ रुपए दावे के तौर पर भुगतान किए गए.

बीमा कंपनियों का लगातार बढ़ रहा फायदा

वर्ष 2016 में शुरू की गई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अलगे साल ही 2017-18 में इसमें पंजीकरण कराने वाले किसानों की संख्या वर्ष 2015 चल रही बीमा योजना में हुए पंजीकरण से भी कम हो गई. “इस योजना को हर साल के अनुसार देखें तो बीमा कंपनियों का फायदा लगातार बढ़ता जा रहा है, और किसानों का क्लेम लगातार कम होता जा रहा.