नई दिल्ली: सरकार द्वारा पेश विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजे जाने को एक अहम कदम माना जा रहा है। इसका मकसद विधेयक पर सभी हितधारकों—राज्य सरकारों, शिक्षाविदों, विश्वविद्यालयों और छात्रों से व्यापक राय और सुझाव लेना है।
विधेयक के प्रमुख प्रावधान
उच्च शिक्षण संस्थानों को शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता देने का प्रस्ताव
गुणवत्ता आधारित शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए नई मान्यता और मूल्यांकन व्यवस्था
शिक्षण के साथ-साथ रिसर्च, इनोवेशन और स्टार्टअप कल्चर को प्रोत्साहन
इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुरूप स्किल डेवलपमेंट, री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग पर जोर
वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा
JPC को भेजने की वजह
सरकार का कहना है कि यह विधेयक उच्च शिक्षा से जुड़े करोड़ों छात्रों और शिक्षकों को प्रभावित करेगा। ऐसे में विपक्ष और कई सांसदों की मांग थी कि इसे जल्दबाजी में पास करने के बजाय विस्तृत संसदीय जांच के लिए भेजा जाए। JPC इस पर:
विशेषज्ञों और शिक्षाविदों की राय लेगी
राज्यों और विश्वविद्यालयों से सुझाव आमंत्रित करेगी, विधेयक में आवश्यक संशोधनों की सिफारिश करेगी
सरकार की मंशा
सरकार के अनुसार, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान देश को ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर ले जाएगा। इससे:
युवाओं में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा
उच्च शिक्षा में आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार होगा
भारत वैश्विक शिक्षा हब के रूप में उभर सकेगा
आगे की प्रक्रिया
संयुक्त संसदीय समिति अपनी रिपोर्ट तैयार कर संसद में पेश करेगी। इसके बाद सरकार विधेयक में संशोधन कर उसे दोबारा सदन में ला सकती है।
