नई दिल्ली. किसान संगठनों ने बिजली कानून और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTAs) के विरोध में आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने बताया कि 18 दिसंबर से डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के बाहर दो दिवसीय धरना दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने मांगों को अनदेखा किया, तो 20 दिसंबर को ‘रेल रोको’ आंदोलन किया जाएगा, जिससे प्रमुख रेलवे रूटों पर ट्रेन सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
किसान नेताओं का आरोप है कि प्रस्तावित Electricity Act संशोधन से बिजली क्षेत्र का निजीकरण होगा। इससे बिजली दरें बढ़ेंगी और किसानों को मिलने वाली सब्सिडी खत्म होने का खतरा है। उनका कहना है कि पहले से ही महंगे इनपुट और फसलों के अस्थिर दाम झेल रहे छोटे व सीमांत किसानों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
FTAs पर कड़ा विरोध
किसान-मजदूर मोर्चा (Kisan Mazdoor Morcha) ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स का भी कड़ा विरोध किया। नेताओं का कहना है कि इन समझौतों से सस्ते विदेशी कृषि उत्पादों के कारण भारतीय किसानों को अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है, जिससे घरेलू कृषि कमजोर होती है और लाखों किसानों व खेत मजदूरों की आजीविका पर खतरा मंडराता है।
शंभू-खनौरी बॉर्डर पर नुकसान की भरपाई की मांग
आंदोलन की एक अहम मांग शंभू और खनौरी बॉर्डर पर लंबे समय तक चले प्रदर्शनों के दौरान हुए नुकसान का मुआवजा है। किसान नेताओं ने बताया कि कई किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा, उनके ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य सामान को नुकसान या चोरी का सामना करना पड़ा।
किसान-मजदूर मोर्चा ने साफ किया कि आंदोलन शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ रहेगा। उन्होंने राज्य सरकार और केंद्र से अपील की कि बातचीत के जरिए मुद्दों का समाधान किया जाए, ताकि आंदोलन को और तेज करने की नौबत न आए।
