कैदियों की मदद से बना था कर्नाटक विधानसभा भवन

कर्नाटक विधानसभा कैदियों की मदद से बना था कर्नाटक विधानसभा भवन

नई दिल्ली. कर्नाटक की सत्ता पर कौन काबिज होगा इसका इंतजार आम लोगों के साथ ही राजधानी बेंगलुरु स्थित व्हाइट हाउस और लंदन के बर्मिंघम पैलेस जैसी झलक देने वाले कर्नाटक विधानसभा भवन को भी है. कर्नाटक विधानसभा के 224 सीटों में से 222 सीटों के लिए मतदान हुआ है, जिसमें 2600 से अधिक उम्मीदवार मैदान में थे. विधानसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमाए जिन प्रत्याशियों को मंगलवार जीत मिलेगी वह विधायक इस आलीशान विधान सौध यानी विधानसभा में बैठेंगे. ऐसे में आइए जानते हैं कि द्रविड़ियन वास्तुकला का नायब उदाहरण यह आलीशान ईमारत आखिर बनी कैसे-

पांच साल में बनकर तैयार हुआ था विधानसभा भवन-

कर्नाटक विधानसभा की वेबसाइट के अनुसार वर्ष 1951 में के. हनुमंतैया मैसूर राज्य के मुख्यमंत्री थे. वे चाहते थे कि अमेरिका के व्हाइट हाउस और लंदन के बर्मिंघम पैलेस की तरह उनके राज्य में भी जनता के प्रतिनिधियों का भवन हो. उनकी कल्पना थी कि भवन की भव्यता से राज्य की महत्ता का भान हो. इसलिए उन्होंने इस भव्य भवन के निर्माण की योजना बनाई. उनकी पहल पर देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 13 जुलाई 1951 को इस भवन की आधारशिला रखी. 1956 में यह भवन बनकर तैयार हुआ. तब इसकी लागत 1.84 करोड़ रुपए आई थी.

कैदियों की मदद से बना था

5000 से अधिक कैदियों ने किया था काम

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, इस भवन का निर्माण कार्य शहर के केंद्रीय कारागार के 5000 से अधिक कैदियों की आज़ादी का कारण बना था क्याोंकि उनको इसके निर्माण के काम में लगाया गया था.

1950 के दशक में हनुमंतैया को यह इमारत बनाने का विचार क्यों आया होगा, इसके बारे में उन्होंने तब एक दैनिक अखबार को अपने दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया बताया था, ‘आप जानते हैं मेरे मन में इस भवन के निर्माण की कल्पना कैसे आयी ? एक रूसी सांस्कृतिक प्रतिनिधि मंडल बैंगलोर के दौरे पर आया था, मैंने उन्हें उस समय शहर के दर्शन करवाए, तब उन्होंने पूछा, ‘ क्या आप अपने वास्तुशिल्प के बारे में जानकारी रखते हैं ? यहां तो सब यूरोपियन इमारतें हैं ? ’ यह बात हनुमंतैया के दिल को लग गई और उन्होंने एक भव्य इमारत विधानसभा भवन को बनाने को फैसला किया.

मैसूर राज्य के मुख्यमंत्री रहे के. हनुमंतैया
60 एकड़ में फैला है विधानसभा भवन

कर्नाटक विधान सौध के आयताकार इमारत का क्षेत्रफल काफी बड़ा है. उत्तर से दक्षिण तक जहां यह 700 फीट का है, वहीं पूर्व से पश्चिम तक करीब 350 फीट. अंदर में 230 गुना 230 फीट के दो सेंट्रल विंग बने हुए हैं. द्रविड़ आर्किटेक्चर शैली में बनी यह इमारत न सिर्फ कर्नाटक, बल्कि देश में सबसे खूबसूरत इमारतों में से एक है. वहीं इसके निर्माण में आधुनिक वास्तुकला का भी प्रयोग किया गया है. भवन का एक महत्वपूर्ण आकर्षण इसके आगे बनी सीढ़ियां भी हैं, जिससे होकर सीधे पहली मंजिल पर स्थित विधानसभा में पहुंचा जा सकता है.

कर्नाटक विधान सौध मुख्यतः तीन फ्लोर हैं जो 1.32 लाख स्कवॉयर फीट के हैं. वहीं टॉप फ्लोर एक लाख वर्गफीट में है. विधान सौध की कुल लंबाई 700 फीट है. वहीं चौड़ाई 350 फीट है और ऊंचाई (जमीन से मुख्य गुंबद तक) करीब 150 फीट है. भवन के बीच का गुंबद 60 फीट का है जिसका भार संभालने के लिए 8 पिलर लगाए गए हैं. भवन में 6 और गुंबद हैं, 4 सामने और 2 पीछे की दिशा में.

विधान सौध में बनी विधानसभा 125 गुना 132 फीट की है. इसकी ऊंचाई 40 फीट है. अभी इसमें 268 लोगों के बैठने की व्यवस्था है, जिसे भविष्य में और 100 लोगों के बैठने लायक बनाया जा सकता है. विधान सौध में विधान परिषद के सदस्यों के लिए भी पर्याप्त जगह है. वर्तमान में 88 लोगों की क्षमता को ध्यान में रखकर बना भवन 100 गुना 78 फीट का है.