हिसार : तीन राजनीतिक घरानों की प्रतिष्ठा दांव पर

हिसार : तीन राजनीतिक घरानों की प्रतिष्ठा दांव पर-Panchayat Times

जींद. देश में लोकसभा चुनाव को लेकर शतरंज बिछ चुकी है और पार्टियों ने अपने मोहरों पर दांव खेल दिया है. अबकी बार प्रदेश में जो सबसे हॉट सीट बनी हुई है वो हिसार लोकसभा सीट है. क्योंकि इस सीट पर भारत के पूर्व उप-प्रधानमंत्री स्वर्गीय ताऊ देवीलाल, पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय चौधरी भजन लाल और किसान मसीहा दीनबंधु सर छोटूराम के नाती की प्रतिष्ठा दांव पर है.

हिसार लोकसभा सीट पर जहां जेजेपी नेता दुष्यंत चौटाला की पिछले पांच साल की कार्यशैली का इम्तिहान है. वहीं केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह के बेटे एवं भाजपा प्रत्याशी आईएएस की नौकरी छोड़कर चुनाव मैदान में कूदे बृजेंद्र सिंह हैं. कांग्रेस ने पूर्व सीएम स्व. भजनलाल के पौते एवं कांग्रेसी दिग्गज कुलदीप बिश्रोई के बेटे कांग्रेस प्रत्याशी भव्य बिश्नोई का भविष्य इस लोकसभा चुनाव पर निर्भर है.

राजनीतिक घरानों की साख दांव पर 

इसी तरह प्रदेश की 7 सीटें ऐसी हैं, जहां दिग्गज नेताओं से लेकर राजनीतिक घरानों की साख दांव पर लगी है और मुकाबला कड़ा है.  सोनीपत सीट पर कांग्रेस ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सामने उतरे दिग्विजय चौटाला की वजह से अब मुकाबला और रोचक होने जा रहा है. हिसार में बिश्नोई, चौटाला और बीरेंद्र सिंह के परिवार के बीच टक्कर है. गुरूग्राम में राव इंद्रजीत और अजय यादव चुनौती देंगे जबकि भिवानी में एक बार फिर धर्मबीर सिंह की बंसीलाल परिवार से मुकाबला होगा.

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हिसार लोकसभा सीट को लेकर है कड़ा मुकाबला दुष्यंत चौटाला की गिनती हरियाणा के अग्रणी सांसदों में रही है. हालांकि दुष्यंत वर्ष 2014 में हजकां प्रत्याशी कुलदीप बिश्रोई को हराकर सांसद बने थे. अब हालात बदले हुए हैं, दुष्यंत चौटाला ने इनेलो से अलग होकर अपनी नई पाटी जेजेपी बनाई है. जेजेपी ने पहला चुनाव जींद विधानसभा उपचुनाव लड़ा था. जिसमें दुष्यंत चौटाला के छोटे भाई दिग्विजय चौटाला मैदान में उतरे थे और उन्हें हार का सामना करना पड़ा था.

इस बार चुनावी मुकाबले में इनेलो ने अपना अलग प्रत्याशी खड़ा किया है. बतौर जजपा नेता दुष्यंत का यह पहला चुनाव है. इसी तरह इस लोकसभा सीट पर पुत्र मोह के चलते लंबे समय तक भाजपा व कांग्रेस की टिकटों की घोषणा अटकी रही. केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह अपने बेटे को यहां से चुनाव मैदान में उतारने के लिए अड़े रहे. भाजपा ने बृजेंद्र को टिकट दिया तो साथ ही केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह ने अपने इस्तीफे की पेशकश की.

बृजेंद्र को राजनीति में उतारने के लिए जहां उनके पिता ने अपने सियासी करियर दांव पर लगाया. वहीं बृजेंद्र सिंह ने अपने नौकरशाह वाला करियर दांव पर लगा दिया. बृजेंद्र अगर चुनाव जीत जाते हैं तो यह अपने-आप में बहुत बड़ी उपलब्धि होगी. इस सीट पर तीसरा चर्चित चेहरा भव्य बिश्नोई का है. हिसार लोकसभा क्षेत्र को शुरू से ही पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भजनलाल का गढ़ कहा जाता रहा है.

हालांकि भजनलाल या उनके परिवार के सदस्यों का शुरू से ही लोकसभा के मुकाबले विधानसभा की तरफ रूझान अधिक रहा है. कांग्रेस इस सीट से कुलदीप बिश्नोई को टिकट देना चाहती थी लेकिन वह अंतिम समय तक अपने बेटे भव्य बिश्नोई के लिए अड़े रहे. कुलदीप इस चुनाव के माध्यम से अपने बेटे को राजनीति में स्थापित करना चाहते हैं.

जिसके चलते उन्हें टिकट की घोषणा से पहले ही प्रचार शुरू कर दिया था. ऐसे में हिसार लोकसभा सीट पर तीन राजनीतिक परिवारों का भविष्य दांव पर लग गया है. जिसका फैसला हिसार लोकसभा के अंतर्गत आने वाले नौ विधानसभा के मतदाता करेंगे.