राज्यसभा के 2 सदस्यों का कार्यकाल इस साल अप्रैल में होगा खत्म

राज्यसभा के 2 सदस्यों का कार्यकाल इस साल अप्रैल में होगा खत्म-Panchayat Times
साभार इंटरनेट

रांची. राज्यसभा के 2 सदस्यों का कार्यकाल इस साल अप्रैल में खत्म होगा. चुनाव आयोग ने प्रदेश में खाली हो रही इन सीटों के लिए मंगलवार को मध्यावधि चुनाव की तारीखों का ऐलान किया. चुनाव प्रक्रिया 6 मार्च से शुरू होगी. 26 मार्च को बैलेट पेपर के जरिए मतदान होगा. इसी दिन शाम को 5 बजे नतीजों का ऐलान कर दिया जाएगा.

साल 2014 में निर्विरोध जीते राजद के प्रेमचंद गुप्ता और निर्दलीय परिमल नथवाणी का कार्यकाल खत्म हो रहा है. झारखंड के 2 राज्यसभा सांसदों समेत 17 राज्यों में 55 राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल में खत्म हो रहा है. इनमें महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 7, इसके बाद तमिलनाडु में 6 और पश्चिम बंगाल में 5 सीटें खाली होंगी. चुनाव आयोग के मुताबिक, 6 मार्च से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी. पर्चा दाखिल करने की आखिरी तारीख 13 मार्च होगी. इसके बाद 16 मार्च को स्क्रूटनी होगी. उम्मीदवार 18 मार्च तक नामांकन वापस ले सकेंगे.

जीत के लिए एक प्रत्याशी को 28 विधायकों का समर्थन जरूरी

9 अप्रैल को राज्यसभा में झारखंड से दो सीटें खाली हो रही हैं. चुनाव में जीत के लिए एक उम्मीदवार को कम से कम 28 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी. झामुमो के पास 30 विधायक हैं. बाबूलाल मरांडी के भाजपा में शामिल होने के बाद इस पार्टी की सदस्य संख्या 26 हो जाएगी. आजसू के दो विधायकों को मिला लें तो भाजपा समर्थक विधायकों की संख्या 28 हो जाती है. वैसे भाजपा का दावा है कि दो निर्दलीय विधायक भी उनके संपर्क में हैं. इन्हें मिला लें तो भाजपा 30 तक पहुंच जाती है. इस प्रकार जेएमएम-भाजपा अपने-अपने उम्मीदवारों को राज्यसभा भेज सकते हैं.

भाजपा मार्च में तय करेगी उम्मीदवार

भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व मार्च में राज्यसभा के लिए उम्मीदवार तय करेगा. भाजपा में अभी असमंजस की स्थिति है. स्थानीय नेताओं पर दांव खेला जाए या बाहरी को टिकट दिया जाए. पार्टी नेता फिलहाल जिला और मंडल अध्यक्षों के मनोनयन में व्यस्त हैं.

छह साल का होता है राज्यसभा सदस्य का कार्यकाल

राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल 6 साल का होता है. इन सदस्यों का चुनाव लोकसभा सदस्यों की तरह प्रत्यक्ष रूप से वोटरों के द्वारा नहीं होता. राज्यसभा सदस्यों का निर्वाचन राज्यों की विधानसभाओं और विधानमंडलों के निर्वाचित सदस्यों के द्वारा किया जाता है. जिस राजनीतिक दल के पास जितने अधिक विधायक होंगे, वह उतने ही अधिक सांसदों को राज्यसभा में भेज सकती है.