इस मंदिर के सातवें दरवाजे के खुलने का इंतजार पूरी दुनिया कर रही है

केरल के तिरुवनंतपुरम में बना पद्मनाभ स्वामी मंदिर दुनिया के लिए सबसे बड़े आश्चर्यों

नई दिल्ली. केरल के तिरुवनंतपुरम में बना पद्मनाभ स्वामी मंदिर दुनिया के लिए सबसे बड़े आश्चर्यों में से एक है. इस आश्चर्य का कारण है वो सातवां दरवाजा जिसके पीछे क्या है शायद कोई नहीं जानता. जितने मुंह उतनी बातें, मंदिर की देखभाल करने वाले त्रावणकोर के राज परिवारवालों का कहना है कि इस दरवाजे को खोलना बिलकुल ठीक नहीं होगा. उनके मुताबिक इस दरवाजे के पीछे एक सुरंग है जो सीधे समुंदर में जाकर मिलता है, अगर इस दरवाजे को खोला गया तो मंदिर के साथ-साथ आस-पास के इलाके के लिए प्रलय आ सकता है. वहीं, दावा ये भी किया जा रहा है कि इस सातवें दरवाजे की रक्षा हजारों विषैले सांप कर रहे हैं. दरवाजा केवल एक सिद्ध पुरुष सही मंत्र उच्चारण करके ही खोल सकता है. किसी और तरीके से इस बंद दरवाजे को खोलने की कोशिश की गई तो मौत निश्चित है.

केरल के तिरुवनंतपुरम में बना पद्मनाभ स्वामी मंदिर दुनिया के लिए सबसे बड़े आश्चर्यों

जितना बताया जा रहा है उससे 10 गुना ज्यादा

मान्यता ये भी है कि उस सातवें दरवाजे के पीछे इतना खजाना छुपा है कि भारत गरीबी एक झटके में खत्म हो सकती है. खरबों रुपए के सोने-चांदी और हीरे-जवाहरात अंदर होने की संभावना है. जून 2011 में सर्वोच्च न्यायालय ने पुरातत्व विभाग तथा अग्निशमन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि मन्दिर के गुप्त तहखानों को खोलें और उनमें रखी वस्तुओं का निरीक्षण करें. इन तहखानों में रखी लगभग दो लाख करोड़ की संपत्ति का पता चला है, लेकिन इतिहासकारों की मानें तो इसके अंदर जितना बताया जा रहा है उससे 10 गुना ज्यादा या उससे भी कहीं ज्यादा संपत्ति हो सकती है. हालांकि, अभी भी तहखाने-बी को नहीं खोला गया है.

मंदिर की पवित्रता और सुरक्षा सुनिश्चित

सुप्रीमकोर्ट ने इस तहखाने को खोलने पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने आदेश किया है कि ये संपत्ति मंदिर की है और मंदिर की पवित्रता और सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए. इतिहासकारों के अनुसार वास्तविकता में इस खजाने में सोने-चांदी के महंगे चेन, हीरा, पन्ना, रूबी, दूसरे कीमती पत्थर, सोने की मूर्तियां, रूबी जैसी कई बेशकीमती चीजें हैं जिनकी असली कीमत आंकना बेहद मुश्किल है.

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कहा जाता है कि 136 साल पहले इस रहस्यमयी दरवाजे को खोलने की कोशिश की गई थी. लेकिन जैसे ही इस दरवाजे को खोलने की कोशिश की गई कुछ ऐसा हुआ कि सबको अपनी मृत्यु सामने नजर आने लगी. हुआ ये कि दरवाजे पीछे पानी की खलखलाहट सुनाई देने लगी, ऐसा लगा मानो दरवाजा खुलते के साथ ही दरवाजे से एक सुनामी आएगी और प्रलय का ऐसा तांडव करेगी कि सब नष्ट हो जाएगा. वहीं कुछ पंडितो ने महसूस किया कि अंदर बहुत बड़े-बड़े सांप फुंफकार रहे हैं. इन्हीं सब बातों को देखते हुए उस वक्त इस तहखाने को हमेशा के लिए बंद रखने का फैसला किया गया.

seventh door of Padmanabhaswamy Temple

मंदिर को कलयुग के पहले दिन ही बनाया गया !

इस मंदिर को सबसे पहले कब बनाया गया ठीक से नहीं कहा जा सकता है. कहा तो ये भी जाता है कि इस मंदिर को कलयुग के पहले दिन ही बनाया गया था. प्रमाणिक तौर पर ये कहा जाता है कि सन 1733 ई. में इस मंदिर का पुनर्निमाण त्रावनकोर के महाराजा मार्तड वर्मा ने करवाया था. कहा ये भी जाता है कि इस स्थान पर भगवान विष्णु की प्रतिमा मिली थी, जिसके बाद इस जगह विशाल मंदिर का निर्माण करवाया गया. जिसे देखने के लिए विश्व भर से लोग खिंचे चले आते हैं. सबके मन में यही प्रश्न है कि क्या कभी इस मंदिर के संपूर्ण रहस्यों से पर्दा उठ पाएगा. क्या वो सातवां तहखाना खुल पाएगा.