जम गई है विश्व प्रसिद्ध नाको झील

जम गई है विश्व प्रसिद्ध नाको झील

रिकांगपिओ. जनजातीय जिला किन्नौर में प्रचंड ठंड ने असर दिखाना शुरू कर दिया है. हालत यह है कि धार्मिक पर्यटन स्थल नाको स्थित प्राकृतिक झील भी जमनी शुरू हो गई है. नाको झील का 95 प्रतिशत भाग पूरी तरह जम गया है. इन दिनों जमी झील के किनारों पर लोग आइस स्केटिंग का आनंद ले रहे हैं. पानी जमने के बाद झील कांच की तरह दिख रही है.

बता दें कि नाको क्षेत्र का अधिकतम तापमान आठ डिग्री तथा न्यूनतम तापमान माइनस दस डिग्री के आपपास दर्ज किया जा रहा है. ठंड इतनी अधिक बढ़ गई है कि रिहायशी घरों के पानी के नल तक जमने से घरों के नलकों से पानी की आपूर्ति तक नहीं हो पा रही है. ठंड बढ़ने से यहां के होटल व कई ढाबे आगामी अप्रैल महीने तक के लिए बंद हो गए हैं. ठंड बढ़ने से नाको स्थित किन्नर कैंप को भी आगामी अप्रैल माह तक के लिए बंद कर दिया गया है.

नाको झील किन्नौर में एक छोटे से पुराने जमाने के नाको गांव में स्थित है. यह प्रसिद्ध हंगरंग घाटी से 2 किमी की दूरी पर स्थित है. इस झील के महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक यह है की वर्ष के अधिकांश भाग के लिए यह बर्फ से ढका रहती है. यह झील चार सुंदर मंदिर और कई पेड़ों से घिरी हुई है, जो इसके सुंदरता को और बढ़ाता है. वहाँ पैर की तरह एक छाप है, जो लोककथाओं के अनुसार, गुरु पद्मसंभव की है जो बौद्ध धर्म के न्यिन्गमा पाठशाला से दूसरे बुद्ध के रूप में जाने जाते हैं. इस क्षेत्र में घोड़े और याक जैसे पशुओं को देखा जा सकता है. इस क्षेत्र के स्थानीय देवता देओदुम हैं, जिनकी मूल निवासी द्वारा पूजा की जाती है.

नाको हिमाचल प्रदेश की खूबसूरती के खजाने में से एक है जो यात्रियों द्वारा अभी अछूती है. यह गांव तिब्बत सीमा पर हैंगरैंग घाटी में अपने सुंदर नाको झील और मठों के लिए जाना जाता है.

नाको झील एक अंडाकार आकार की झील है जिसकी सुंदर पहाड़, घाटियां और पुते हुए गांव शोभा बढ़ाते हैं. गर्मियों के दौरान दूर के स्थानों से लोगों को प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव करने के लिए, नौका विहार करने के लिए आकर्षित करती है, जबकि सर्दियों में जमी हुई झील आइस स्केटिंग के लिए केंद्र बन जाती है.

दसवीं और तेरहवीं शताब्दी के दौरान पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में बौद्ध संस्कृति के तहत एक जटिल कलात्मक संस्कृति विकसित हुई है. यह सभी नाको गांव के सात मंदिरों में भी देखा जा सकता है.

त्योहार और मेले गांव के अन्य आकर्षण हैं. पर्यटक भी समारोहों में भाग ले सकते हैं. पारंपरिक लामा नृत्य जिसे च़ाम या मुखौटा नृत्य के रूप में जाना जाता है, क्षेत्र में बहुत लोकप्रिय हैं. उनके नृत्य के माध्यम से लामा बुरी ताकतों की हार दिखाते हैं.

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