फेक न्यूज: ‘छपाक’ फिल्म में नहीं बदला गया नाम, स्वराज्य ने फैलाई थी गलत जानकारी

नई दिल्ली. स्वराज्य वेबसाइट ने एक भ्रामक लेख प्रकाशित किया कि फिल्म निर्माताओं ने फिल्म में हमलावर को हिंदू नाम देकर उसकी मुस्लिम पहचान को छुपाने की कोशिश की है.

इस लेख में दावा किया गया था कि फिल्म निर्माताओं ने हमलावर की मुस्लिम पहचान छुपाने के लिए फिल्म में एक हिंदू नाम का इस्तेमाल किया है. दिपिका फिल्म में मुख्य किरदार निभा रहीं हैं. यह फिल्म एसिड हमले की शिकार हुई लक्ष्मी अग्रवाल के जीवन पर आधारित है. यह घटना साल 2005 में हुई थी. फिल्म की रिलीज से कुछ दिन पहले ही ट्विटर यूजर्स ने आरोप लगाया था कि फिल्म निर्माताओं ने एसिड से हमला करने वाले नईम खान का नाम बदल कर राजेश कर दिया है.

साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि ऐसा, हमलावर की मुस्लिम पहचान छिपाने और उसे हिंदू के रूप में चित्रित करने के लिए किया गया है. इन एकाउंट्स को स्वराज्य द्वारा देखा गया और बाद में लेख प्रकाशित किया था. जिसकी हेडलाइन का हिंदी अनुवाद था, “यह बॉलीवुड है: दीपिका पादुकोण-स्टारर छपाक में, एसिड हमलावर नईम खान राजेश बन गए.”

एक ही स्रोत से उपजा था मामला

इस मामले में आरोप एक ही स्रोत से उपजा था और वो है इंटरनेट मूवी डेटाबेस, यूजरों ने आईएमडीबी पेज के कैरेक्टरों के नामों की वास्तविक जीवन के कैरेक्टरों से तुलना की, और यह माना कि फिल्म में एसिड हमलावर का नाम राजेश ही होगा. स्वराज्य के लेख में यह भी दावा किया है कि आरोप अटकलों से उपजा है, और इसके लिए कोई तथ्यात्मक आधार प्रदान नहीं करता है.

यहां तक कि भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने आरोपी का नाम मुस्लिम से हिंदू बदलने पर कानूनी कार्रवाई की धमकी भी दे डाली.

जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में जाने के बाद हुआ ये विवाद

कुछ दिन पहले जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में छात्रों पर नकाबपोश भीड़ द्वारा एक हमले के पीड़ितों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए पादुकोण ने विश्वविद्यालय के छात्रों से मुलाकात की थी. विश्वविद्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के 24 घंटे से भी कम समय के भीतर यह हमलावर के नाम वाली खबर फैलना शुरू हो गई थी.

लेकिन फिल्म देखने के बाद ये साफ हो गया है की फिल्म निर्माताओं ने किसी भी कैरेक्टर का धर्म नहीं बदला है, केवल नाम बदल दिए हैं. जैसे “तेजाब हमलावर का नाम बदलकर बशीर उर्फ ‘बबलू’ कर दिया गया है.” हांलाकि हमलावर का असली नाम नईम खान था, जो “गुड्डू” नाम से भी जाना जाता था. एसिड हमलावर का नाम वास्तव में बशीर था, न कि राजेश.

जैसे ही सोशल मीडिया यूजर्स ने स्वराज्य को ध्यान दिलाया कि उनका दावा निराधार और भ्रामक था, उन्होंने उस लेख की हेडलाइन बदल दी, जिसका हिंदी अनुवाद है, “छपाक से नाराज़गी के बाद, रिपोर्ट्स का दावा है कि फिल्म में मुख्य आरोपी, नईम खान को हिंदू नाम नहीं दिया गया है.”

वहीं आपको बता दें पंचायत टाइम्स, आईजीपीपी और सोशल मीडिया मैटर्स ने पिछले दिनों ‘चुनाव, मीडिया और फेक न्यूज’ के विषय पर एक सर्वे किया है और चुनाव में फेक-न्यूज अभियान की शुरुआत की है. इस अभियान में पंचायत टाइम्स झारखंड में फैले अपने रिपोर्टरों के माध्यम से जनता में फेक न्यूज के प्रति जागरूकता बढ़ायेगा. साथ ही चुनाव के दौरान फेक-न्यूज के प्रचार प्रसार को रोकने में मदद करेगा.