गुरुग्राम सीट पर इस समुदाय का है विशेष महत्व

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प्रतीक चित्र

रेवाड़ी. हरियाणा में छठे चरण में 12 मई को होने वाले चुनाव को लेकर गुड़गांव लोकसभा सीट पर अभी तक किसी भी दल ने अधिकारिक रूप से अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है. चूंकि यह हॉट सीट है, इसलिए संभवतया सभी दल एक दूसरे के उम्मीदवार की घोषणा के इंतजार में है. वैसे कांग्रेस और भाजपा के संभावित उम्मीदवारों के नाम लंबे समय से चर्चा में है. खैर उम्मीदवार भी हो जाएंगे, लेकिन राजनीतिक लोगों की जिज्ञासा इस बात में है कि आखिर इस सीट पर मुकाबला किस-किस दल और उम्मीदवार के बीच होगा.

गलियारों में चर्चा यह भी जोरों पर है कि मुकाबला कांग्रेस व बीजेपी के बीच होगा, लेकिन तीसरा वह दल किसी भी एक पार्टी का अप्रत्यक्षरूप से सहयोगी बनेगा, जो इस सीट से मुस्लिम उम्मीदवार खड़ा करेगा. इसी सीट पर करीब 4 लाख मुस्लिम वोट है.

वर्ष 2009 में गुड़गांव लोकसभा सीट दोबारा से आस्तित्व में आई थी, इससे पहले लंबे समय तक गुड़गांव, महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट का हिस्सा रहा है. इस सीट पर ज्यादातर कब्जा कांग्रेस का रहा है. 1999 के चुनाव में कारगिल लहर व 2014 में मोदी की लहर में यह सीट भाजपा के हिस्से में आई थी. यूं तो पूर्व में गुड़गांव लोकसभा क्षेत्र से मुस्लिम उम्मीदवार भी विजयी हुए हैं. वर्ष 2009 व 2014 के चुनाव में इस सीट पर एक बात सामने आई, कि चाहे दल कोई भी रहा हो, लेकिन मुस्लिम वोट व उम्मीदवार का अपना ही वजूद रहा है.

दूसरे नंबर पर मुस्लिम उम्मीदवार रहा है. इन परिणामों से एक बात जरूर कही जा सकती है कि बेशक मुस्लिम उम्मीदवार जीतने की स्थिति में नहीं हो, लेकिन किसी भी दल का खेल बिगाड़ने में अहम रोल अदा कर सकता है. यही कारण है कि देश के दो प्रमुख व मजबूत दल कांग्रेस व भाजपा की नजर किसी भी दल द्वारा उतारे जाने वाले उम्मीदवारों पर टिकी है. चर्चा है कि मुस्लिम समुदाय के वोट भाजपा में नहीं जाएंगे, वह बात अलग है कि भाजपा में शामिल कोई भी मुस्लिम नेता अपने प्रभाव से कुछ वोटों का रुख उधर मोड़ दें, लेकिन उनसे बात बनने वाली नहीं है.

मुस्लिम उम्मीदवार को भी पार्टी के कार्यकर्ताओं के अलावा विशेषतौर पर अहीरवाल में ज्यादा महत्व नहीं दिया जाएगा, इसका प्रमाण 2009 व 2014 के चुनाव में सामने आ चुका है.  मुस्लिम समुदाय के मजबूत नेता जाकिर हुसैन ने हालांकि दोनों बार अलग-अलग दल से चुनाव लड़ा, लेकिन हार का ही सामना करना पड़ा, वे दूसरे नंबर पर रहे. कांग्रेस व भाजपा की नजर अब इनेलो, जेजेपी, आप व बसपा-लोकतंत्र पार्टी के उम्मीदवारों पर टिकी हुई है. गलियारे में चर्चा है कि यदि कोई भी दल इस सीट से मुस्लिम उम्मीदवार उतारता है, भाजपा में नहीं जाने वाले मुस्लिम वोट, कांग्रेस को भी ज्यादा नहीं मिलेंगे. इसलिए भाजपा को कांग्रेस से ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं पड़ेगी. यदि कोई दल हिंदू उम्मीदवार ही उतारता है तो गुरूग्राम सीट पर कांग्रेस व भाजपा में रोचक मुकाबला होने की उम्मीद बढ़ जाएगी.

इसका कारण यह है कि कांग्रेस हमेशा से मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करती आई है. भाजपा के भी कांग्रेस पर ही यही आरोप रहे हैं और इसका कांग्रेस को लाभ मिल जाएगा. अब देखना यह है कि गुरूग्राम लोकसभा सीट पर कौन सा ऐसा दल है, जो मुस्लिम उम्मीदवार उतारकर एक दल से अप्रत्यक्षरूप से मोहब्बत निभाता है.