कैबिनेट की बैठक में लिए गए यह महत्वपूर्ण निर्णय

शिमला. कैबिनेट की बैठक सोमवार को शिमला आयोजित की गई. बैठक में जनता के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए. इस बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने की. कैबिनेट की बैठक में  निर्णय लिया गया कि राज्य में बीमार औद्योगिक इकाईयों के मरम्मत के लिए प्रोत्साहन योजना की जांच की जाएगी. कैबिनेट ने सोलन जिले के चम्बाघाट स्थित परिधि गृह भवन तथा कण्डाघाट में अस्पताल भवन के निर्माण के लिए दी गई गई स्वीकृतियों की जांच करवाने का निर्णय लिया.

रिपोर्ट के अनुसार यह निर्माण पिछली कांग्रेस सरकार की ओर से कैबिनेट की पूर्व अनुमति के बिना शुरू करवाया गया था और इस प्रकार रूल ऑफ बिजनेस और निर्देशों की अवहेलना की.

100 पद सीधी भर्ती के माध्यम से भरे जाएंगे :

बैठक में आयुर्वेद विभाग में अनुबन्ध के आधार पर आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारियों के 200 पदों को भरने की मंजूरी प्रदान की गई. आयुर्वेदिक चिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिए 100 पद बैचवाईज और 100 पद सीधी भर्ती के माध्यम से भरे जाएंगे. यह निर्णय राज्य के लोगों को उनके घरद्धार के समीप आयुर्वेद चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने में मददगार होगा.

बैठक में किसानों को ऋण सुविधा के लिए हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी कृषि तथा ग्रामीण विकास बैंक सीमित के पक्ष में राज्य सरकार की 325 करोड़ रुपये के गारंटी समर्थन 31 मार्च, 2019 तक जारी रखने को स्वीकृति प्रदान की.
मंत्रीमंडल ने कांगड़ा जिले के सलाह जन्द्राह स्थित राजकीय आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केन्द्र का नाम शहीद जगदीश सिंह राणा के नाम पर रखने का निर्णय लिया, जो शहीद के लिये श्रद्वांजलि होगी.

नौकरियां

मंत्रीमंडल ने हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से सीधी भर्ती से सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के 12 पद भरने को कार्योत्तर स्वीकृति प्रदान की. मंत्रीमंडल ने राजीव गांधी राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल पपरोला में पांच पद लैब तकनीशियन, एक पद अधीक्षक श्रेणी-2, एक पद वरिष्ठ सहायक तथा एक पद कनिष्ठ कार्यालय सहायक (आई.टी) के भरने के लिये स्वीकृति प्रदान की.

बैठक में दो पद बागवानी प्रभारी और आयुर्वेदिक विभाग में एक पद सहायक वनस्पतिज्ञ के भरने का निर्णय लिया गया।

मंत्रीमंडल ने आबकारी नीति को दी स्वीकृति : 

मंत्रीमंडल ने आबकारी नीति, 2018-19 को भी स्वीकृति प्रदान की. नीति का मुख्य उद्देश्य नागरिकों, उपभोक्ताओं, उत्पादकों, आपूर्तिकर्ताओं, बॉटलरों, थोक व परचून विक्रेताओं और सरकार की अपेक्षाओं पर खरा उतरना है. इसमें शराब के उत्पादकों से थोक विक्रेताओं और उनसे परचून विक्रेताओं की आपूर्ति को सुचारू बनाने पर बल दिया गया है.

आबकारी नीति से राज्य के राजस्व में वर्ष 2018-19 में लगभग 1552.88 करोड़ रूपये अर्जित करने में सहायता मिलेगी, जो वर्ष 2017-18 में अर्जित राजस्व से 271.33 करोड़ अधिक है अर्थात इसमें 21.17 प्रतिशत की समुचित वृद्धि होगी.

‘ईज ऑफ डुइंग बिजनेस’ अर्थात व्यापार में सुगमता की नीति के अनुरूप सोर्स लाइसेंस प्राप्त करने की शर्तों को आसान किया गया है तथा आबकारी करों की संख्या में भी कटौती की गई है. जहां तक परचून विक्रेताओं का सम्बन्ध है, उन्हें ‘अनलिफटिड मिनिमम ग्रांटेड कोटा’ की शर्तां में राहत प्रदान करते हुए बड़ी छूट दी गई है. आबंटन के समय परचून विक्रेताओं के लिए तय की गई सिक्योरिटी राशि को 18 प्रतिशत से घटाकर 13 प्रतिशत किया गया है. यह निर्णय परचून विक्रेता व्यापार में निवेश के लिए पर्याप्त वर्किंग कैपिटल की उपलब्धता सुनिश्चित बनाएगा.

बीयर पर आयात शुल्क कम :

ईएनए (मुख्य कच्ची सामग्री) तथा बीयर पर आयात शुल्क कम करके तथा शराब की बिक्री (सीएल-कन्ट्री लिक्वर तथा आईएमएफएल-इण्डियन मेड फोरेन लिक्वर) पर अधिकतम बिक्री मूल्य प्रणाली लागू करके यह सुनिश्चित बनाया गया है. इससे लाईसेंस धारकों के बीच स्वच्छ तथा स्वस्थ प्रतिस्पर्धा आएगी.  दरों को सभी परचून दुकानों पर प्रदर्शित किया जाएगा. राज्य के लोगों के कल्याण के दृष्टिगत सीएल की प्रति बोतल पर एक रुपया तथा आईएमएफएल की प्रत्येक बोतल की बिक्री पर 2 रुपये एकत्र किए जाएंगे, जिसे क्रमशः एम्बुलेंस सेवाएं निधि तथा स्थानीय निकायों के कल्याण के लिए आवंटित किया जाएगा.

हिमाचल प्रदेश में वाईन उत्पादकों को उनके उत्पाद सीधे तौर पर परचून विक्रेताओं तथा बार में बिक्री की अनुमति का निर्णय लेकर उन्हें बड़ी राहत प्रदान की गई है. वाईन उद्योग तथा बागवानी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए अनेक आबकारी करों को कम किया गया है तथा परिवहन शर्तों में भी छूट दी गई है, और साथ ही राज्य के बाहर तैयार की गई वाईन पर आयात शुल्क में बढ़ौतरी की गई है.