राजस्थान विधानसभा की वह 10 सीटें, जिनपर देशभर की हैं निगाहें

यह हैं राजस्थान विधानसभा की वह 10 सीटें, जिनपर देशभर की हैं निगाहें

जयपुर. राजस्थान विधानसभा के लिए चुनाव प्रचार अपने अंतिम चरण में हैं. राजस्थान का किला दोबारा फतह करने के लिए जहां बीजेपी ने अपनी पूरी फौज को लगा दिया है वहीं सत्ता में वापसी के लिए कांग्रेस ने भी पूरा जोर लगा दिया है. 7 दिसंबर को राजस्थान की विधानसभा की 200 सीटों के लिए मतदान होगा लेकिन, इनमें से 10 सीटें ऐसी हैं, जिनपर न केवल राजस्थान बल्कि देश की भी नजरें टिकी हुई हैं. यह वह सीटें हैं जहां से मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, बीजेपी के बागी घनश्याम तिवाड़ी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सीपी जोशी जैसे लोग चुनाव लड़ रहे हैं.

झालरापाटन: वसुंधरा राजे के सामने मानवेंद्र सिंह

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के गृह निर्वाचन क्षेत्र झालावाड़ की झालरापाटन विधानसभा सीट पर इस बार राजस्थान ही नहीं दिल्ली की भी नजरें टिक गई हैं. क्योंकि, इस सीट पर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के सामने कांग्रेस ने मारवाड़ के दिग्गज नेता मानवेंद्र सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है. इस सीट पर मानवेंद्र और वसुंधरा राजे के आमने-सामने होने के बाद से ये प्रदेश की सबसे हॉट सीट बन गई है. इस सीट के खास बनने के पीछे सबसे बड़ा कारण दोनों ही नेताओं की राजनीतिक तनातनी भी है. पूर्व विदेशमंत्री जसवंत सिंह को 2014 में सांसद के चुनाव का टिकट नहीं मिलने के बाद से मानवेंद्र सिंह भाजपा से नाराज थे. अब उनके कांग्रेस में जाने के बाद पार्टी ने उन्हें वसुंधरा राजे के सामने उतारकर इस चुनाव को दिलचस्प बना दिया है. वसुंधरा राजे 2003 से इस सीट पर लगातार तीन बार विधायक चुनी जा चुकी हैं.

सांगानेर: भाजपा के बागी की प्रतिष्ठा है दांव पर

चुनाव से पहले भाजपा छोड़कर नई पार्टी बनाकर सियासी ताल ठोक चुके दिग्गज नेता घनश्याम तिवाड़ी की इस सीट पर इस बार चुनाव काफी दिलचस्प बन गया है. भारत वाहिनी पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष तिवाड़ी इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. वहीं, भाजपा ने इस सीट पर वैश्य कार्ड खेलते हुए महापौर अशोक लाहोटी को मैदान में उतारा है. वहीं, कांग्रेस ने पुष्पेंद्र भारद्वाज पर दांव खेला है. अब तक भाजपा के खाते में रहने वाली इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने की चुनौती जहां पार्टी के सामने है. वहीं, कांग्रेस भी भाजपा के गढ़ में सेंध लगाना चाहती है. वहीं, तिवाड़ी के मैदान में होने के चलते दोनों दलों की राहें काफी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है.

टोंक: पायलट और यूनुस में मुकाबला

राजस्थान की हॉट सीट में इस बार टोंक विधानसभाक्षेत्र का नाम जुड़ गया है. इस सीट पर कांग्रेस के प्रदेश मुखिया सचिन पायलट मैदान में है. पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे पायलट के मैदान में आने के बाद भाजपा ने इस सीट के प्रत्याशी में बदलाव करते हुए वरिष्ठ नेता यूनुस खान को मैदान में उतारा है. कांग्रेस के पायलट और भाजपा के यूनुस के मैदान में आने के बाद यहां का सियासी मुकाबला रोचक हो गया है. यहां से भाजपा ने विधायक अजीत मेहता का टिकट काटते हुए नामांकन से ठीक पहले मुस्लिम कार्ड खेला है. इस सीट के लिहाज से दोनों ही उम्मीदवार बाहरी हैं, लेकिन, राजनीतिक कद में बड़े होने के कारण सभी की निगाहें इस सीट पर टिक गई है. इस सीट के बदलते सियासी समीकरण पर हर कोई नजर गड़ाए बैठा है.

हॉट सीट बनी बीकानेर की दोनों सीटों से किसे होगा नुकसान- Panchayat Times
प्रतीक चित्र

उदयपुर शहर: कटारिया और व्यास की टक्कर

मेवाड़ के वरिष्ठ नेता और गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया के गढ़ उदयपुर में इस बार हो रहे चुनावी संग्राम का दिलचस्प है. यहां के सियासी समीकरण पर सभी की निगाहें टिकी हैं. कटारिया के सामने कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता डॉ. गिरिजा व्यास को मैदान में उतार दिया है. कांग्रेस ने इस बार व्यास को मैदान में उतारकर कटारिया को पटखनी देने की रणनीति बना रही है. वहीं, यहां से इस बार कटारिया का विरोध करते हुए जनता सेना के बेनर तले दलपत सुराणा भी मैदान मैं हैं. जिसके बाद यहां का मुकाबला त्रिकोणीय होता जा रहा है. माना जा रहा है कि इस बार कटारिया के चुनावी राह में पहले से अधिक चुनौतियां हैं.

नाथद्वारा: गुरू को चुनौती दे रहा चेला

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सीपी जोशी एक बार फिर नाथद्वारा सीट से चुनाव मैदान में उतर गए हैं. इस सीट पर उन्हें 2008 के चुनाव में महज एक वोट से हार मिली थी. इस दौरान वे कांग्रेस की तरफ से सीएम के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे. इस सीट पर फिर से जोशी मैदान में आ गए हैं. वहीं भाजपा ने सीपी जोशी के सामने राजपूत वोटरों को टार्गेट करते हुए महेश प्रताप सिंह को मैदान में उतारा है. महेश कांग्रेस को छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं. महेश प्रताप के सामने आने के बाद सीपी जोशी ने बयान भी दिया है कि जिसने मुझसे राजनीति सीखी है, वही अब सामने मैदान में है. बहरहाल इस सीट पर होने वाले मुकाबले में सभी की नजरें टिकी हुई हैं.

लाडपुरा: पति की जगह नेता पत्नियां मैदान में

हाड़ौती की प्रमुख सीटों में से एक लाडपुरा में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिला है. इस सीट पर भाजपा ने तीन बार से विधायक चुने जा रहे वरिष्ठ नेता भवानी सिंह राजावत का टिकट काटकर उनकी जगह कांग्रेस से भाजपा में आए पूर्व सांसद इज्यराज सिंह की पत्नी कल्पना को टिकट दिया है. वहीं, कांग्रेस ने नईमुद्दीन गुड्डू की पत्नी गुलनाज को मैदान में उतारा है. टिकट कटने पर नाराज भवानी सिंह ने पहले निर्दलीय ताल ठोक दी थी. लेकिन, मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की ओर से मनाने पर भवानी सिंह ने पर्चा वापस ले लिया. इस सीट पर अब मुख्य मुकाबला कल्पना सिहं और गुलनाज के बीच है. कल्पना सिंह पूर्व राजपरिवार से हैं, ऐसे में इस सीट के समीकरण पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं.

डीग-कुम्हेर: अनुभव और युवा की टकराहट

भरतपुर की हॉट सीट डीग-कुम्हेर से कांग्रेस के टिकट पर विधायक और वरिष्ठ नेता विश्वेंद्र सिंह फिर से मैदान में हैं. भरतपुर राजघराने के पूर्व महाराज विश्वेंद्र सिंह के मुकाबले भाजपा ने दिवंगत नेता दिगंबर सिंह के पुत्र डॉ. शैलेष सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है. शैलेष सिंह पहली बार चुनाव के मैदान में उतरे है. 2013 के चुनाव में मोदी लहर के बीच विश्वेंद्र सिंह ने पूर्व चिकित्सा मंत्री दिगंबर सिंह को हरा दिया थी. कांग्रेस की पहली सूची में विश्वेंद्र सिंह का नाम नहीं आने के बाद एक बारगी यहां की सियासत गर्मा गई थी. इस सीट पर राजनीति के अनुभवी विश्वेंद्र सिंह और युवा डॉ शैलेश के बीच होने वाले मुकाबले पर हर किसी की निगाह टिकी हुई है.

बीकानेर पश्चिम: जोशी और कल्ला ठोक रहे ताल

कांग्रेस की ओर से किए गए टिकट बंटवारे के दौरान अंतिम समय में बीकानेर की सीटों को लेकर हुए राजनीतिक उलटफेर के बीच बीकानेर पश्चिम को लेकर जमकर घमासान हुआ. इस सीट पर पहली सूची में बीडी कल्ला का टिकट कटने के बाद बवाल मच गया. कल्ला की जगह यहां से कांग्रेस ने यशपाल गहलोत को टिकट देकर उतार दिया. लेकिन, कल्ला समर्थकों के बढ़ते विरोध के बीच पार्टी ने इस सीट पर उम्मीदवार में बदलाव करते हुए कल्ला को फिर से मैदान में उतारा गया है. जबकि, यशपाल गहलोत को बीकानेर पूर्व में भेजा गया. लेकिन, बाद में वहां से भी गहलोत का टिकट काट दिया गया. बीकानेर की सीटों को लेकर सियासी खेल खेलने वाले नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी यहां के सीटों का समीकरण रोचक बना दिया है. इस सीट पर भाजपा ने तीन बार विधायक रहे गोपाल जोशी को फिर से मैदान में उतारा है. जोशी दो बार कल्ला को हरा चुके हैं. इस सीट से गोपाल गहलोत ने निर्दलीय नामांकन दाखिल किया है.

शिव: खान और खुमान में कड़ा मुकाबला

बाड़मेर की शिव विधानसभा सीट पर इस बार सभी की निगाहें लगी हुई हैं. क्योंकि, इस सीट से विधायक पूर्व विदेशमंत्री जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह हैं. मानवेंद्र कांग्रेस में शामिल होने के बाद वसुंधरा राजे के सामने झालरापाटन से चुनाव लड़ रहे हैं. ऐसे में उनके अपने गढ़ में शिव सीट पर होने वाले सियासी मुकाबले पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं. इस सीट पर भाजपा की तरफ से खुमान सिंह सोढ़ा चुनावी मैदान में हैं. जबकि, कांग्रेस ने इस बार अमीन खान को चुनावी मैदान में उतारा है. अमीन खान 8 बार चुनाव लड़ चुके हैं, जिनमें से चार बार जीत मिली है. जबकि, खुमान सिंह पहली बार विधायक का चुनाव लड़ रहे हैं. इनकी बेटी शिव पंचायत समिति की प्रधान हैं. ऐसे में इस सीट पर भाजपा-कांग्रेस के प्रत्याशियों की ट्क्कर पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं.

पोकरण-मठ और फकीर की जंग

पाकिस्तान से सटे सरहदी जिला जैसलमेर का पोकरण परमाणु परीक्षण के चलते पूरे विश्व में प्रसिद्ध है. लेकिन, इस बार पोकरण सियासी रूप से भी खास बन चुका है. इस सीट पर कांग्रेस ने जहां मुस्लिमों के धर्म गुरू गाजी फकीर के बेटे सालेह मोहम्मद को दोबारा मैदान में उतारा है. जबकि, भाजपा ने इस बार तारतरा मठ के महंत प्रतापपुरी को मैदान में उतारकर यहां हिंदुत्व कार्ड खेल दिया है. दोनों दलों के प्रत्याशियों की ओर किए जा रहे प्रचार के दौरान वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश की जा रही है. सियासी मैदान में हिंदु-मुस्लिम में बंटते समीकरण के बीच हर किसी की निगाहें इस सीट पर टिकी हुई है.