जिन्होंने सबसे पहले अलग झारखंड राज्य का सपना देखा…

जिन्होंने सबसे पहले अलग झारखंड राज्य का सपना देखा...

रांची/नई दिल्ली. अलग राज्य का आंदोलन शुरू करने से लेकर संसद में आदिवासियों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने वाले झारखंड के महानायक जयपाल सिंह मुण्डा की आज जयंती है. जयपाल सिंह मुण्डा ही वे पहले नेता थे, जिन्होंने सबसे पहले अलग झारखंड राज्य की मांग उठाई थी. अपनी मांग को पूरा करने के लिए उन्होंने झारखंड पार्टी की स्थापना की थी. इस पार्टी का चुनाव चिन्ह मुर्गा हुआ करता था.

साल 1952 और 1957 में उनकी पार्टी को बड़ी सफलता मिली थी. इतना ही नहीं, जयपाल सिह मुंडा की कप्तानी में ही 1928 के एम्सटर्डम ओलंपिक में इंडियन हॉकी टीम को पहला गोल्ड मेडल मिला था. इतना कुछ होने के बावजूद झारखंड में बड़ा मालिक (देशज उपाधि मरङ गोमके, मुंडारी भाषा का शब्द) उपेक्षित हैं.

घर तोड़ खड़ी हुई कॉमर्शियल बिल्डिंग

हॉकी के महान प्लेयर जयपाल सिंह मुंडा का रांची के सीरमटोली स्थित योगदा सत्संग आश्रम के सामने जयपाल ओड़ा नामक आवास था. इसमें वह लंबे समय तक रहे. इसी घर में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू उनसे मिलने आए थे. कई ऐतिहासिक घटनाओं के गवाह रहे इस घर पर आज एक प्राइवेट बिल्डिंग खड़ी हो गई है. यहां पर केएफसी रेस्टोरेंट खुल गया है. सरकार चाहती तो इस जगह को संरक्षित कर सकती थी, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया है. आज लोगों को पता ही नहीं है कि कभी जयपाल सिंह का घर यहां था.

जयपाल सिंह के नाम पर खानापूर्ति

जयपाल सिंह मुंडा के नाम पर खेलगांव में मरड गोमके जयपाल सिंह मुंडा मेगा स्पो‌र्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाया गया है, लेकिन यहां पर उनसे संबंधित किसी भी स्मृति को नहीं रखा गया है. जबकि हॉकी के इस महान खिलाड़ी से संबंधित बहुत सारी चीजें हैं, जिसे यहां पर प्रदर्शनी के लिए रखी जा सकती हैं. लेकिन इसके लिए कोई प्रयास नहीं हुआ. आलम यह है कि इस स्पो‌र्ट्स कॉम्प्लेक्स में जयपाल सिंह की उपाधि भी हिन्दी और इंग्लिश में गलत लिखी गई है. यहां पर मोरंग गोमके जयपाल सिंह मुण्डा मेगा स्पो‌र्ट्स कॉम्प्लेक्स लिखा गया है. जिसमें मोरंग गोमके गलत है. दरअसल, जयपाल सिंह मुंडा को देशज उपाधि मरङ गोमके दी गई थी, जो मुण्डारी भाषा का शब्द है और जिसका अर्थ बड़ा मालिक है.

प्रमोद पाहन से जयपाल सिंह मुण्डा

पहले रांची जिले का ही पार्ट रहे खूंटी के पास गोविंदपुर के टकरा गांव में 3 जनवरी 1903 को पैदा हुए प्रमोद पाहन कैसे जयपाल सिंह मुण्डा बनकर देश-दुनिया में छा जाएंगे. कुंवर जरियागढ़ स्टेट के सहयोग से उन्होंने रांची में पढ़ाई की. इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए ऑक्सफोर्ड चले गए. वहां पर वह पहली पर ऑक्सफोर्ड के हॉकी और फुटबॉल दोनो टीमों के कैप्टन बने. पहली बार किसी इंडियन को यह गौरव हासिल हुआ.

1928 के एम्सटर्डम ओलंपिक के लिए इन्हें इंडियन हॉकी टीम का कैप्टन चुना गया. इसके पहले सिर्फ अंग्रेज ही टीम के कैप्टन होते थे. जयपाल सिंह की शादी मैडम जहांआरा से हुई थी. जयपाल सिंह मुंडा का 20 मार्च 1970 को निधन हो गया.