मकर सक्रांति: पवित्र सरोवरों पर कंपकंपाती ठंड के बीच उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

मकर सक्रांति: पवित्र सरोवरों पर कंपकंपाती ठंड के बीच उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब - Panchayat Times

शिमला. प्रदेश के पवित्र सरोवरों में मकर संक्रांति के स्नान पर्व पर मंगलवार सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है.  

तत्तापानी में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं का स्नान

शिमला व मंडी जिला की सीमा पर स्थित तत्तापानी में हजारों की संख्या में श्रद्धालु स्नान व दान इत्यादी कर रहें है. शिमला सहित पर्वतीय इलाकों में बर्फबारी और शीतलहर ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है, बावजूद इसके श्रद्धालुओं की भक्ति में कोई कमी नहीं देखी जा रही है.  सर्द हवाओं के बीच लोग तत्तापानी सहित अन्य धार्मिक सरोवरों में मकर संक्रांति का स्नान करने पहुंच रहे हैं.

जयराम ठाकुर भी तत्तापानी में लगाएंगे आस्था की डुबकी

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी दिन में तत्तापानी में आस्था की डुबकी लगाएंगे.  खास बात यह है कि इस मौके पर तत्तापानी में 1100 किलोग्राम खिचड़ी भी श्रद्धालुओं में वितरित की जाएगी.  राज्य पर्यटन विभाग तत्तापानी क्षेत्र को पर्यटन गंतव्य स्थल बनाने के उद्देश्य से बड़े स्तर पर खिचड़ी कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है.  

मकर संक्रांति पर जिला बिलासपुर स्थित महर्षि मारकंडेय की तपोस्थली मारकंडेय तीर्थ में भी स्नान के लिए बड़ी तादाद में श्रद्धालु उमड़े हुए हैं.  शिमला, सोलन, हमीरपुर बिलासपुर सहित प्रदेश के कोने-कोने से पहुंचकर श्रद्धालुओं ने तीर्थ स्थल पर पहुंचकर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान किया.  कई श्रद्धालु सोमवार रात को ही यहां पहुंच गए थे.

मान्यता है कि मारकंडेय तीर्थ में स्नान करने से कष्टों का निवारण होता है.  बिलासपुर के गेहडवीं के रुकमणि कुंड में भी सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पहुंचकर स्नान किया.  स्नान करने वालों की अधिकतर भीड़ सुबह ब्रह्म मुहूर्त में रही.

माईपुल में भी श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

शिमला जिला में ठियोग के समीप माईपुल में भी श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई.  इसी तरह कुल्लू जिले में वशिष्ठ व मणीकर्ण के चश्मों में भी लोग स्नान कर रहे हैं.  कांगड़ा जिले में देहरा के समीप ब्यास नदी के बांए तट पर कालेश्वर मंदिर में भी श्रद्धालु स्नान के लिए उमड़े.  

इस बीच कांगड़ा, ऊना व बिलासपुर जिलों के विभिन्न शक्तिपीठों में श्रद्धालुओं का तांता सुबह से ही लगना शुरू हो गया.  इस मौके पर मन्दिरों को विशेष रूप से सजाया गया है.  मकर संक्रांति को मौसम में बदलाव और बड़े दिनों की शुरूआत के रूप में देखा जाता है.