मिनी स्विट्जरलैंड को संवारने के लिए सरकार करेगी एक करोड़ खर्च

मिनी स्विट्जरलैंड को संवारने के लिए सरकार करेगी एक करोड़ खर्च

शिमला. किसी ने सच ही कहा है कि अगर धरती पर कहीं जन्नत है तो वह है स्विट्जरलैंड में लेकिन अपने देश में एक ऐसी जगह है जिसे इसका दर्जा हासिल है. हिमाचल प्रदेश की चम्बा घाटी में स्थित ‘खजियार’ को दुनिया के 160 मिनी स्विट्जरलैंड में से एक माना जाता है. यहां एक तश्तरीनुमा झील है,जो 1.5 किलोमीटर लम्बी है. इस झील की खूबसूरती पर लोग फिदा हैं मगर धीरे-धीरे समय के साथ इसके अस्तित्व को ही खतरा पैदा हो गया है. ऐसे में इस झील के संरक्षण के लिए सरकार एक करोड़ रुपए खर्च करने जा रही है.

खजियार जो कभी मिनी गुलमर्ग कहलाता था को 7 जुलाई 1992 को मिनी स्विटजरलैंड के रूप में मान्यता मिली. जब भारत में स्विट्जरलैंड के दूतावास के प्रमुख विली टी.बलेसर ने खजियार में एक पीले साइनबोर्ड की भी सरकारी तौर पर स्थापना की जिस पर खजियार की स्विस राजधानी बर्न से 6194 किमी की दूरी भी दर्शाई गई है. अब तक विश्व के 160 देशो में ही मिनी स्विटजरलैंड स्थापित हुए हैं. मिनी स्विटजरलैंड के रूप में मान्यता प्राप्त इस पर्यटन स्थल का क्षेत्रफल 2,27,670 वर्ग मीटर है. खजियार से एक पत्थर भी स्विस राजधानी बर्न ले जाकर वहां संसद भवन के सामने स्थापित किया गया है.

मिनी स्विट्जरलैंड को संवारने के लिए सरकार करेगी एक करोड़ खर्च

खजियार झील पर मंडरा रहा खतरा :

पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र रही खजियार झील में पिछले कुछ सालों से ध्यान नहीं देने के कारण इसमें गाद भर गई. जिसके बाद हिमाचल प्रदेश के साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग ने इसे लेकर एक अध्ययन करके एक रिपोर्ट तैयार की. जिसमें बताया गया कि खजियार झील को बचाना बेहद जरूरी है. इस क्षेत्र में पशुओं की आवाजाही इसको नुकसान पहुंचा रही है. पशुओं का गोबर भी झील में जा रहा है वहीं लगातार मिट्टी इस पानी में घुल रही है और ये एकत्र होकर झील के लिए खतरा बनी रही है. जिसके बाद सरकार ने इसके संरक्षण की योजना बनाई.

ब्रिटिश अधिकारियों ने इस जगह खोज की थी :

सन 1850 की बात है. ब्रिटिश अधिकारियों का एक दल चम्बा की दुर्गम घाटियों की ख़ाक छानता फिर रहा था. इस दल को ब्रिटिश सरकार ने आदेश दिया था कि चम्बा की धौलाधार पर्वत शृंखलाओं में स्थित किसी ऐसे स्थल का पता लगाया जाए , जो नैसर्गिक सौन्दर्य के लिहाज से प्रकृति के स्वर्ग से कम न हो और साथ ही जहां की जलवायु भी स्वास्थ्यवर्धक हो. इसी लक्ष्य के लिए ब्रिटिश अधिकारी चम्बा घाटी में प्रकृति का स्वर्ग तलाश रहे थे. एक दिन अचानक दल की निगाह देवदार एक घने वृक्षों के बीच स्थित हरे-भरे मैदान पर पड़ी. दल के सदस्य बीच मैदान में पहुच गए. चारो ओर का नजारा दर्शनीय था. देवदार के ऊँचे-ऊँचे पेड़ो से घिरा मैदान और उसमे एक तश्तरीनुमा झील इस स्थल की सुन्दरता में चार चाँद लगा रही थी. दल ने सरकार को भेजी अपनी सिफारिश में इस स्थल की दिल खोलकर प्रशंसा की. जिसके बाद यहाँ छावनी स्थापित की गई.

सन 1900 में लार्ड कर्जन जब इस स्थल पर आए तो यहां का प्राकृतिक दृश्य ने उन पर मानो जादू सा कर दिया. सम्मोहित से लार्ड कर्जन बुदबुदा बैठे “अरे वाह ! भारत में स्विटजरलैंड” बस फिर तो खजियार की ख्याति बढ़ती गई और ब्रिटिश अधिकारियों का यह पसंदीदा स्थल बन गया. गोल्फ खेलने और तफरीह करने के लिए अंग्रेज यहाँ आने लगे. यहाँ की तश्तरीनुमा झील में तैराना बड़ा (टीला) भी प्रकृति का एक करिश्मा ही लगा. उन्हें हवा के झोंको से यह टीला कभी एक ओर जाता और कभी दूसरे किनारे आ लगता. ऐसी मान्यता कि पहले इस झील में दो टीले तैरते थे. पाप का टीला और पुन्य का टीला. कालान्तर में पूण्य का टीला झील में समा गया और पाप का टीला सदियों से विराजमान है.

खजियार को लेकर कई रोचक किंवदंतियां हैं :

इस स्थान का नाम खजियार कैसे पड़ा , इसके बारे में एक रोचक किंवदती प्रचलित है. कहा जाता है कि कालान्तर में यहाँ पर किसी सिद्ध देवता का वास था. एक बार कही से घूमते-फिरते एक नाग यहाँ आ पहुचा. उसे यह स्थल बहुत भाया और वह यही बस गया. सिद्ध देवता को नाग की उपस्थिति अखरने लगी. जिसके बाद इस स्थान के आधिपत्य को लेकर दोनों में संघर्ष हो गया. काफी देर तक संघर्ष चलता रहा. अंतत: सिद्ध देवता ने अपनी हार मानते हुए यह स्थल नाग देवता के हवाले कर दिया और कहा “ले तू खा और जी”. तब से ही स्थल का नाम खाजी पड़ा जो बिगड़ते बिगड़ते खजियार बन गया.

खजियार में इसी नाग देवता की बड़ी मान्यता है. यहां उनका लकड़ी का एक मन्दिर भी है. ऐसी मान्यता है कि इस मन्दिर के निर्माण में एक ही विशाल पेड़ की लकड़ी का इस्तेमाल हुआ है. मन्दिर सात सौ वर्ष पुराना है. इसके काष्ट फलक पर हुयी नक्काशी देखते ही बनती है. मन्दिर के गर्भगृह सर्वाधिक दर्शनीय है. कहा जाता है कि जब सिद्ध देवता और नाग देवता में हुई लड़ाई में सिद्ध देवता ने अपनी हार स्वीकार की थी तो नाग देवता ने वचन देते हुए कहा कि उनके साथ सिद्ध देवता की पूजा भी हुआ करेगी. शायद इसलिए नाग देवता के मन्दिर के बाहर उनकी पत्थर की प्रतिमा विद्यमान है.

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चम्बा शहर से 24 किमी दूरी पर है खजियार:

खजियार का मौसम कुछ इस कदर मनमोहक और रोमांचित करने वाला है कि यहाँ आकर फिर जाने को दिल नहीं करता. वैसे तो खजियार में तरह-तरह के रोमांचक खेलों का भी आयोजन किया जाता है लेकिन अगर आप गोल्फ के शौकीन हैं तो आपके लिए यह हिल स्टेशन और भी बेहतर है. अगर आप हिमाचल प्रदेश के चंबा या डलहौजी जाते हैं तो वहां से महज आंधे घंटे की दूरी पर है खजियार है. यही नहीं, खजियार चंडीगढ़ से 352 और पठानकोट रेलवे स्टेशन से मात्र 95 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.