नदी के बहाव को रोकने के लिए रोजाना डाली जा रही है बालू और मिट्टी

नदी के बहाव को रोकने के लिए रोजाना डाली जा रही है बालू और मिट्टी -Panchayat Times

रामगढ़. जल है तो जीवन है और पानी के लिए दामोदर नदी लाइफ लाइन, यानि सबसे बड़ा जलस्रोत है. रामगढ़ जिले से गुजरने वाली इस नदी के पानी से एक हिस्से की आबादी की प्यास बुझ रही है. लेकिन, जिसके पानी से प्यास बुझ रही है, अब उसे ही प्यासा करने की खतरनाक कोशिश की जा रही है. क्योंकि, नदी से रोजाना 300 टन से अधिक बालू और मिट्टी की खुदाई हो रही है. वहीं, नदी के किनारे को डंप यार्ड बनाकर प्लांटों की छाई गिराई जा रही है. ऐसे में नदी का पानी कम होता जा रहा है.

इससे नदी का ही दायरा सिकुड़ रहा है. कई इलाकों में नदी के किनारे तेजी से आबादी भी बढ़ रही है. शहरी क्षेत्र के नालियों का गंदा पानी और कचरा भी नदी में जा रहा है. यही हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं, जब नदी सिमट कर सूख जाएगी और यह नाला का रूप ले लेगी. फिर लोग पानी के लिए जीवन में जद्दोजहद करते रहेंगे. दामोदर नदी से ही शहर में जलापूर्ति हो रही है. यानि, नदी के पानी से शहर की डेढ़ लाख आबादी की प्यास बुझ रही है.

कैंटोनमेंट बोर्ड का गढ़बांध में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट है. यहां से नदी के पानी को फिल्टर कर सुबह और शाम को सप्लाई की जा रही है. जबकि, फेज टू के तहत भी दूसरा ट्रीटमेंट प्लांट बनाया रहा है.इससे भी नदी के पानी को फिल्टर कर बड़ी आबादी को जलापूर्ति की जाएगी. इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी नदी के पानी से जलापूर्ति की जा रही है. इसमें, रामगढ़ नगर परिषद क्षेत्र के कई गांव हैं. कैथा, सांडी, छतरमांडू, कुंदरुकला, अरगड्डा व सिरका सहित कई गांव शामिल हैं. यहां, नदी के पानी से घरों तक जलापूर्ति की जा रही है. नदी से रोजाना लाखों गैलन पानी लोगों के घरों तक पहुंचाया जा रहा है.

बालू व मिट्टी निकालने के लिए नदी की धारा को ही रोक दिया

नदी से बालू व मिट्टी निकालने के लिए लोगों ने नदी की धारा को ही रोक दिया है.नदी के पानी को रोकने के लिए मिट्टी डाल दी गई है. इससे रोजाना 24 ट्रैक्टर मिट्टी तो 20 ट्रैक्टर बालू की खुदाई हो रही है. करीब 300 टन से अधिक दोनों की खुदाई हो रही है. इसके अलावा नदी के किनारे से ही अवैध कोयला का उत्खनन भी किया जा रहा है.

पहले चुआं बना पीते थे पानी अब हो गई नदी प्रदूषित

दामोदर नदी के किनारे बालू में चुआं बनाकर पीने के लिए पानी निकालते थे. लेकिन, अब तो नदी का पानी प्रदूषित हो जा रहा है.रोजाना नालियों का गंदा पानी और कचरा नदी में गिर रहा है. जबकि, प्लांटों का भी डस्ट नदी में मिल रहा है.इससे नदी का पानी तेजी से प्रदूषित हो रहा है.

माध्यमPT DESK
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