एनडीए में भी एक दर्जन सीटों पर झकझूमर

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रांची. अब एनडीए में भी सीट शेयरिंग को लेकर मोल मोलाई शुरू हो गई है. एनडीए में एक दर्जन सीटों पर झकझूमर चल रहा है. हालांकि आजसू 20 से 21 सीटों का दावा कर रही है. लेकिन 12 सीट ऐसे हैं जिसमें पेंच सुलझाना आसान नहीं होगा. पुख्ता सूत्रों के अनुसार रामगढ़ सीट पर बीजेपी ने भी इच्छा जताई है. इसके पीछे तर्क दिया है कि लोकसभा चुनाव में जब बीजेपी ने अपनी सीटिंग सीट गिरिडीह आजसू को सौंप दी थी, तो विधानसभा में आजसू को भी रामगढ़ सीट छोड़ देनी चाहिए, क्योंकि चंद्रप्रकाश चौधरी अब सांसद हो गए हैं.

हटिया सीट को लेकर एनडीए में अलग तरह की रार है. इस सीट से आजसू पीछे हट सकती है, बशर्ते हटिया से वर्तमान बीजेपी विधायक नवीन जासयवाल को टिकट न मिले. नवीन को मंत्री न बनाने के पीछे कहीं न कहीं आजसू का ही दबाब था.

आजसू के लिए तीन सीटें ही मानी जा रही है सेफ 

आजसू के लिए अब तक तीन सीटें ही सेफ मानी जा रही है, जो आजसू के खाते में बिना पेंच के आ सकती हैं. जिसमें सिल्ली, टुंडी और जुगसलाई शामिल है. इसके अलावा चंदनकियारी, लोहरदगा, सिमरिया, मांडू, हटिया, चक्रधरपुर, बड़कागांव, तमाड़ और डुमरी में पेंच ही पेंच है. इन पेंच को सुलझाना आसान नहीं होगा.

इधर भाजपा ने 65 प्लस के मिशन को लेकर अपने तेवर तल्ख कर लिए हैं. बीजेपी किसी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहती.

बीजेपी का क्या है तर्क

बीजेपी के अंदर खाने से जो बात सामने आ रही है वह यह है कि आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो एनडीए में रहते हुए दो विधानसभा चुनाव हार चुके हैं. इसमें एक उपचुनाव भी शामिल है. इसके अलावा आजसू गोमिया और लोहरदगा उपचुनाव भी हार चुकी है. हालांकि गिरडीह लोकसभा सीट जीत कर आजसू को कुछ राहत तो जरूर मिली है, लेकिन बीजेपी के अंदर खाने की खबर है कि विधानसभा और लोकसभा चुनाव में काफी अंतर होता है.

सुखदेव भगत के भाजपा में आने से आजसू की परेशानी और बढ़ गई है. वहीं चंदनकियारी बीजेपी की सीटिंग सीट है.
मांडू सीट पर बीजेपी अपना उम्मीदवार देना चाहती है. पहले जेपी पटेल को आजसू में शामिल करने की कोशिश की गई थी, लेकिन मामला बना नही. अंत में जेपी पटेल ने बीजेपी का दामन थाम लिया.