आदिवासी समुदाय को नजदीक से देखने और जानने का मौका मिला : रामनाथ कोविंद

आदिवासी समुदाय को नजदीक से देखने और जानने का मौका मिला : रामनाथ कोविंद - Panchayat Times

गुमला. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा है कि डिग्री हासिल कर लेना वाला व्यक्ति पूरी तरह से शिक्षित नहीं होते हैं, शिक्षित वो होता है जो अच्छा इंसान होता है. अच्छा इंसान बनना शिक्षा की कसौटी है. उन्होंने कहा कि सभी समुदायों में से किसी के पास संसाधन सीमित है, किसी के पास कम है और किसी के पास बिलकुल नहीं है. लेकिन शिक्षा एक ऐसा संसाधन है जो सबके पास है. हम अपने बच्चों को अधिक से अधिक और भरपूर शिक्षा दें. इसके लिए राज्य और केंद्र की सरकार काम कर रही है. अगर हम किसी को शिक्षा का ज्ञान और दान नहीं दे सकते हैं तो उसके लिए हम शिक्षा का प्रेरणास्वरूप जरूर बनें. आप अपने बच्चों को पढ़ाइए और अच्छा आचरण दीजिए. राष्ट्रपति शनिवार को गुमला के बिशुनपुर में आयोजित विकास भारती के कार्यक्रम में बोल रहे थे.

इससे पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पद्मश्री अशोक भगत के विकास भारती में संचालित योजनाओं के बारे में जाना. फिर आदिवासी ट्राइबल सेंटर स्थित ज्ञान निकेतन में अनाथ आदिम जाति व जनजाति के बच्चों से मुलाकात की. इसके बाद राष्ट्रपति देवघर पहुंचे. यहां उन्होंने पत्नी के साथ बाबा बैद्यनाथ मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की. राष्ट्रपति को बाबा मंदिर में तीर्थ पुरोहित ने विधि-विधान से पूजा कराई. लगभग आधे घंटे तक राष्ट्रपति ने बाबा बैद्यनाथ की पूजा अर्चना की.राष्ट्रपति के कार्यक्रम को लेकर उनकी सुरक्षा के मद्देनजर सुबह 10.30 बजे से उनके जाने तक मंदिर में आम लोगों के लिए पूजा-अर्चना पर प्रतिबंध रहा. पूजा के बाद राष्ट्रपति सर्किट हाउस में शाम तक रुकेंगे. फिर वे शाम को रांची लौटेंगे. राजभवन में रात्रि विश्राम के बाद वे रविवार की सुबह 10 बजे रायपुर के लिए रवाना हो जाएंगे.

2016 के बाद अब मेरी यहां आने की प्रतीक्षा पूरी हुई

राष्ट्रपति ने कहा कि जब मैं बिहार का राज्यपाल था तब रांची तक आया था. उस वक्त भी अशोक भगत से मुलाकात हुई थी. बिशुनपुर के बारे में मैंने बहुत कुछ सुना था. उस वक्त मैंने कहा था कि अगली बार जब मैं आऊंगा तो बिशुनपुर जाउंगा. लेकिन ऐसा संयोग बना कि 2016 के बाद 2017 में मैं बिहार से दिल्ली पहुंच गया. 2018 में मैं फिर रांची आया. यहां अशोक भगत से मुलाकात हुई तो मैंने उनसे कहा कि मेरा बिशुनपुर का कार्यक्रम अधूरा है. मैं चलना चाहता हूं. तब अशोक भगत ने कहा कि जब भी आप बताएंगे, मैं चलूंगा. 2019 में राष्ट्रपति होने के नाते प्रत्येक प्रदेश में अधिक से अधिक तीन बार जाना होता है. व्यवहारिक दिक्कतें हैं. वैसे भी 30 प्रदेश हैं, छह केंद्र शासित प्रदेश हैं, जाना है तो सभी में जाना है, सभी अपने हैं.इसलिए मैंने फिर से 2019 में कार्यक्रम बनाया कि मैं बिशुनपुर जाउंगा. आपको पता है कि जब मैं रांची आया, कार्यक्रम भी बन चुका था लेकिन बारिश के चलते कार्यक्रम रद हो गया. मुझे दो दिन तक रांची में रूककर प्रतीक्षा करनी पड़ी.2016 से जिसके लिए मैं प्रतीक्षा कर रहा था, वो आज पूरी हुई, इसकी मुझे खुशी है.

झारखंड की धरती के बारे में कहा…

राष्ट्रपति ने कहा कि झारखंड त्याग, बलिदान, संघर्ष और स्वाभिमान की धरती है. ये मानवीय गुण सभी जगह नहीं होती. भारत की भूमि का अपना अलग महत्व है. यहां के वीरों ने आनेवाली पीढ़ी और हम सबके लिए प्रेरणा दी है. उनके प्रेरणा से हम सीख सकते हैं तो सीखेंगे. जो नहीं सीखना चाहता वो न तो भूतकाल से सीखता है और न वर्तमान से. जो नहीं सीखना चाहते वो पड़ोसी से भी नहीं सीखते हैं. कुछ लोग जानबूझकर भी अनजान बनते हैं.राष्ट्रपति ने कहा कि महात्मा गांधी ने कहा था कि अगर मेरी कोई बात आपको अच्छी लगती है तो आप उसे अपना लीजिए. लेकिन किसी से ये मत कहिए कि ये गांधी ने कहा है। आप इसे कहिए कि मैंने कहा है क्योंकि वो बात आपके आचरण में आ जाती है.

राष्ट्रपति ने कहा कि भ्रातृत्व भाव देश को जोड़ता है. मुझमें और आपमें अंतर है, अंतर होता है आचरण से और यदि आचरण में अंतर दिखाई पड़ता है तो वो फिर अंतर होता है. मनुष्य होकर प्रयास ये करना चाहिए कि हम सब जब एक इंसान हैं, तो फिर उसमें अंतर दिखना नहीं चाहिए. आचरण में अंतर नहीं आना चाहिए. यहां आने से पहले मैंने कहा था कि मैं लोगों से मिलना चाहूंगा.लोगों से राष्ट्रपति ने कहा कि आपसब आदिवासी समुदाय के शुभचिंतक हैं. उन्होंने कहा कि देश बदल रहा है और हम सबको भी खुद को बदलना है. उन्होंने कहा कि हमारे पास संसाधन सीमित है, जनसंख्या बढ़ती जा रही है.

आदिवासी समुदाय को नजदीक से देखने और जानने का मौका मिला : रामनाथ कोविंद-Panchayat Times

आदिवासी समुदाय के बारे में राष्ट्रपति ने कहा…

राष्ट्रपति ने कहा कि शुक्रवार को सेंट्रल यूनिवर्सिटी के कार्यक्रम से लौटने के दौरान मैंने देखा कि रास्ते में एक जगह आदिवासी समुदाय के बच्चे, बूढ़े, महिला बैठे हैं. वे सभी मुझे देखने के लिए बैठे थे. मैंने प्रोटोकॉल तोड़कर गाड़ी रुकवायी और उनसे मिलने पहुंचा. मुझे आदिवासी समुदाय को नजदीक से देखने और जानने का मौका मिला.राष्ट्रपति ने कहा कि मंच पर बैठे केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा और राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू इसी समुदाय से आते हैं, इन्हें मैं सालों से जानता हूं और मिलता रहा हूं. लेकिन इन्हें जानने और ये जिस समुदाय से आते हैं, उनको जानना… दोनों में अंतर है.

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अशोक भगत के बारे में कहा…

राष्ट्रपति ने अशोक भगत के बारे में कहा कि इन्हें मैं वर्षों से जानता हूं. वे उत्तर प्रदेश से आते हैं, यहां आकर इस तरह से रच बस गए हैं. उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय को हम इसलिए पिछड़ा मानते हैं क्योंकि उनमें आधुनिक मैनर्स का अभाव होता है. इसका मतलब ये नहीं है कि वो ये सब जानते नहीं हैं. वे बस दिखावा नहीं करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि जब अशोक भगत मुझे भेंट दे रहे थे तो मैंने कहा कि आप अपना चेहरा सामने रखिए ताकि मीडिया के साथी फोटो खिंच सकें। उन्होंने कहा कि मुझे इससे फर्क नहीं पड़ता है कि मीडिया फोटो खिंच रही है या नहीं। ये भाव केवल आदिवासी समुदाय में होता है. अशोक भगत यहां आकर आदिवासी समुदाय में रच बस गए हैं। उन्होंने कहा कि अशोक भगत साधन संपन्न परिवार से आते हैं. उनके यहां आने के फैसले से शायद उनके परिवार के लोग उन्हें कोस रहे होंगे. वे कहते होंगे कि हमारा, बेटा, भाई, रिश्तेदार कहां निकल गया। वे गांव में रहते, साधन संपन्न होकर नेता, विधायक, एमपी, मंत्री बन सकते थे.लेकिन साधन संपन्न होते हुए भी उन्होंने परिवार का त्याग किया सिर्फ आदिवासी समुदाय के लिए.