झारखंड : 22 जिलों से आये पड़हा पंचायत के प्रतनिधियों ने हाईकोर्ट में की शिलापट्ट लगाने की कोशिश, बोले यहां के हम मालिक

झारखंड : 22 जिलों से आये पड़हा पंचायत के प्रतनिधियों ने हाईकोर्ट में की शिलापट्ट लगाने की कोशिश, बोले यहां के हम मालिक - Panchayat Times

रांची. झारखंड उच्च न्यायालय के परिसर में सोमवार 22 फरवरी को उस समय हंगामा मच गया, जब प्रदेश के 22 जिलों से आये पड़हा पंचायत के प्रतनिधियों ने भारत का राजपत्र खुदा हुआ शिलापट्ट हाईकोर्ट के गेट नंबर-1 के पास डॉ भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के सामने स्थापित करने कि कोशिश की.  

न्यायलय के बाहर जुटी भीड़ को देखते हुए स्थानीय पुलिस भी वहां पहुंची और जमा लोगों को वहां से हटाने का प्रयास किया. लेकिन जनजातीय समुदाय के ये लोग नहीं माने. जिसके बाद अफरा तफरी के माहौल में बड़ी संख्या में पुलिस प्रशासन वहां पहुंचा और करीब तीन घंटे की कड़ी मशकत के बाद इन लोगो को वहां से समझा बुझाकर वहां से हटाया गया.

क्या कह रहे थे पड़हा पंचायत के सदस्य

शिलापट्ट स्थापित करने पहुंचे पड़हा पंचायत के सदस्यों का कहना था कि संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची पैरा-6 के उप पैरा 2 के तहत आदिवासियों के मिले अधिकारों को यहां की सरकार और अधिकारी लागू नहीं होने देना चाहते हैं. यही वजह है कि यहां के आदिवासी दबे और शोषण के शिकार हो रहे हैं.

आदिवासी समुदाय के लोग ने कहा कि पांचवीं और छठी अनुसूची के तहत झारखंड के आदिवासियों पर कोई केस मुकदमा लागू नहीं होता है. और उनका कानून भी अलग है. रांची जिला झारखंड राज्य के 5वें अनुसूचित जिला में शामिल है.

इसका शासन- प्रशासन और नियंत्रण आदिवासियों के हाथ में हैं. आर्टिकल-13 के तहत यह अधिकार दिया गया है. यह क्षेत्र मुंडा और उरांव लोगों का है. मुंडा और उरांव का क्षेत्र पड़हा व्यवस्था से संचालित होता है.

क्या लिखा था शिलापट्ट के ऊपर

दरअसल शिलापट्ट पर लिखा था कि रांची, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा, लातेहार, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसवां, साहेबगंज, दुमका, पाकुड़ और जामताड़ा अनुसूचित जिले हैं.

अनूसूचित जिले में अभी भी झारखंड सरकार का मौजूदा कानून लागू है, जबकि झारखंड सरकार के कानून का विस्तार इन इलाकों में नहीं किया जा सकता है. अनुसूचित क्षेत्रों में आम जनता के लिए भी स्वतंत्रता का अधिकार नहीं है.